El Nino 2027 Weather Update: प्रशांत महासागर में तेजी से बदलती परिस्थितियों ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। 2026 में विकसित हो रहा El Nino अगर मौजूदा अनुमानों के मुताबिक मजबूत बना रहता है, तो इसका असर अगले साल यानी 2027 के वैश्विक तापमान और मौसम के पैटर्न पर दिखाई दे सकता है।
ब्रिटेन के Met Office समेत कई वैज्ञानिक संस्थान इस बार विकसित हो रहे अल-नीनो पर नजर बनाए हुए हैं। Met Office के मुताबिक यह घटना बेहद मजबूत हो सकती है। हालांकि अभी से इसे निश्चित रूप से 100 साल का सबसे भयंकर कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि आने वाले महीनों में इसकी वास्तविक तीव्रता साफ होगी।
आखिर El Nino है क्या?
अल-नीनो कोई तूफान या सीधे तौर पर आने वाली प्राकृतिक आपदा नहीं है। यह प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ने और उससे जुड़े वायुमंडलीय बदलावों की स्थिति है।इसका असर सिर्फ प्रशांत महासागर तक सीमित नहीं रहता। समुद्र के तापमान में बदलाव के साथ हवाओं और बारिश के pattern में परिवर्तन होता है, जिसका प्रभाव दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग रूप में देखने को मिल सकता है।यही वजह है कि वैज्ञानिक किसी बड़े El Nino को लेकर पहले से संभावित असर का आकलन करते हैं।
2027 को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
El Nino के दौरान वैश्विक औसत तापमान में अस्थायी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। Met Office ने अपनी 2026 की climate update में कहा है कि इस अल-नीनो के कारण 2027 के record-breaking year बनने की संभावना बढ़ती है। इसका मतलब यह नहीं है कि 2027 में दुनिया के हर हिस्से में एक जैसा तापमान रहेगा। बल्कि वैश्विक औसत तापमान पर असर पड़ने की संभावना है, जबकि अलग-अलग देशों में इसका प्रभाव बारिश, सूखे, गर्मी या तूफानी मौसम के रूप में अलग हो सकता है।वैज्ञानिकों के लिए चिंता की दूसरी वजह यह है कि El Nino का असर पहले से चल रही मानव-जनित global warming के ऊपर जुड़ सकता है।
क्या 2027 में 2024 का रिकॉर्ड टूटेगा?
2024 अभी तक सबसे गर्म calendar years में सबसे ऊपर है। Met Office की ताजा assessment के मुताबिक 2026 से 2030 के बीच कम से कम एक साल के 2024 के global temperature record से ऊपर जाने की 86 फीसदी संभावना है। इसी assessment में 2027 को खास तौर पर संभावित record-breaking year बताया गया है। इसलिए 2027 को लेकर वैज्ञानिकों की नजर खास तौर पर बनी हुई है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है El Nino?
भारत के लिए अल-नीनो की खबर इसलिए अहम है क्योंकि इसका असर मानसून पर पड़ सकता है।ऐतिहासिक तौर पर El Nino की स्थिति भारत में कमजोर मानसून की संभावना बढ़ा सकती है, हालांकि हर El Nino event का असर बिल्कुल एक जैसा नहीं होता। Met Office भी मानता है कि El Nino भारत सहित कई क्षेत्रों में monsoon patterns को प्रभावित कर सकता है। भारत में बारिश का बड़ा हिस्सा खेती और पानी की उपलब्धता से सीधे जुड़ा है। इसलिए अगर मानसून का वितरण गड़बड़ाता है तो इसका असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहता।
किसानों के लिए बढ़ सकती है चुनौती
अगर किसी इलाके में बारिश सामान्य से कम रहती है और तापमान ज्यादा बढ़ता है तो खेती पर दबाव बढ़ सकता है। सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है और कुछ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।वहीं दूसरी तरफ कुछ क्षेत्रों में El Nino के कारण बारिश ज्यादा भी हो सकती है।
समुद्र का तापमान कितना बढ़ सकता है?मौजूदा forecasts इसEl Nino को मजबूत event बनने की तरफ इशारा कर रहे हैं। जून में Met Office ने बताया था कि central और eastern tropical Pacific में sea-surface temperature anomaly 2°C से ज्यादा पहुंचने की संभावना थी और कुछ forecasts इससे भी ज्यादा मजबूत event की ओर इशारा कर रहे थे।अगस्त की रिपोर्टिंग में Reuters ने बताया कि UK Met Office के अनुमान के अनुसार समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3°C से अधिक ऊपर जा सकता है।यही वजह है कि इस बार के अल-नीनो को लेकर इतनी चर्चा हो रही है।