Asaduddin Owaisi: संसद से 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' पारित होने के बाद देश में नया सियासी घमासान शुरू हो गया है। विधेयक के प्रावधानों को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर हमला बोला है। वहीं दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पूर्ण राज्य के दर्जे और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के बिगड़ते हालातों पर अपना बयान जारी किया है।

'मैं मुस्लिम हूं, अल्लाह के सिवा किसी की इबादत नहीं कर सकता'
राष्ट्रीय सम्मान संशोधन विधेयक पारित होने के बाद AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने 'वंदे मातरम' को अनिवार्य बनाने के प्रयासों का कड़ा विरोध किया है। बता दें कि ओवैसी ने कहा कि मैं एक मुस्लिम हूं और अल्लाह के सिवा किसी की इबादत नहीं करता। यदि मैं किसी और की इबादत करूंगा, तो अपने मजहब के खिलाफ हो जाऊंगा। इस दौरान उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि इसे अनिवार्य बनाना संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 के तहत मिली धार्मिक स्वतंत्रता व सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन है।

'जन गण मन' और 'वंदे मातरम' में बताया अंतर
ओवैसी ने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के बीच अंतर बताते हुए कहा कि 'जन गण मन' देश और उसके नागरिकों के सम्मान का प्रतीक है, जबकि 'वंदे मातरम' में देवी-देवताओं की आराधना का भाव निहित है। उनके अनुसार, दोनों की प्रकृति अलग है और इन्हें एक समान नहीं माना जा सकता।

उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्ष 1950 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गीत का दर्जा देना औपचारिक संसदीय प्रक्रिया के बिना हुआ था। ओवैसी ने कहा कि संविधान में 'राष्ट्रीय गीत' की कोई स्पष्ट संवैधानिक परिभाषा नहीं दी गई है।

विधेयक पर बढ़ा राजनीतिक विवाद
राष्ट्रीय सम्मान संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस कानून के कुछ प्रावधान संवैधानिक अधिकारों से जुड़े सवाल खड़े करते हैं। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि यह विधेयक राष्ट्रीय सम्मान, देशभक्ति और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं, क्योंकि इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। 

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Written By Shailesh Yadav