आज कल हम सभी टेलीविज़न पर ज्यादा समय बिताते हैं फिर चाहें बात यूट्यूब की हो या ओटीटी की हम घंटो टीवी के सामने बैठे रहते हैं ऐसे मे विज्ञापनो का बार बार आना दर्शकों को काफी परेशान कर देता है जिसे देखते हुए अब टीवी में दर्शकों के लिए बड़ा बदलाव किया जा रहा है। सरकार ने टेलीविजन चैनलों पर हर घंटे अधिकतम 12 मिनट विज्ञापन दिखाने की करीब दो दशक पुरानी सीमा हटाने का फैसला किया है। बता दें कि नया नियम आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद लागू कर दिया जाएगा।
यह सीमा साल 2006 में लागू की गई थी। इसके तहत एक घंटे में अधिकतम 12 मिनट विज्ञापन दिखाए जा सकते थे। इनमें 10 मिनट व्यावसायिक विज्ञापन और 2 मिनट चैनल के स्वयं के प्रचार के लिए रखे गए थे।
क्यों हटाया गया 12 मिनट वाला नियम?
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मुताबिक, 2006 के बाद टेलीविजन उद्योग में काफी बदलाव आया है। उस समय देश में करीब 62 टीवी चैनल थे, जबकि अब इनकी संख्या 900 से ज्यादा हो चुकी है। सरकार का कहना है कि टीवी और डिजिटल मीडिया के बीच प्रतिस्पर्धा भी काफी बढ़ गई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन अवधि के लिए टीवी जैसा समान वैधानिक प्रतिबंध नहीं है। ऐसे में पारंपरिक टीवी चैनलों को बराबरी का प्रतिस्पर्धी माहौल देने के लिए पुराने नियम में बदलाव किया गया है।
क्या अब टीवी पर ज्यादा विज्ञापन आएंगे?
इस बदलाव का सबसे सीधा असर दर्शकों पर पड़ सकता है। अब चैनलों के लिए हर घंटे विज्ञापन दिखाने की पुरानी 12 मिनट की सीमा नहीं रहेगी। इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में कुछ चैनल कार्यक्रमों के दौरान पहले से ज्यादा विज्ञापन दिखा सकते हैं। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर चैनल तुरंत बहुत ज्यादा विज्ञापन दिखाना शुरू कर देगा। विज्ञापन की वास्तविक अवधि चैनलों की व्यावसायिक रणनीति और नए नियमों के तहत तय व्यवस्था पर निर्भर करेगी।
कब से लागू होगा नया नियम?
सरकार के फैसले की घोषणा हो चुकी है, लेकिन नया बदलाव केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों में संशोधन की राजपत्र अधिसूचना जारी होने के बाद लागू होगा। यानी फिलहाल दर्शकों को यह समझना चाहिए कि सरकार ने 12 मिनट की सीमा हटाने का फैसला किया है, लेकिन इसके प्रभावी होने की प्रक्रिया आधिकारिक अधिसूचना से जुड़ी है।
दर्शकों के लिए क्या बदलेगा?
टीवी चैनलों को विज्ञापन दिखाने में ज्यादा स्वतंत्रता मिलेगी और उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिल सकती है। दूसरी ओर, दर्शकों के लिए कार्यक्रमों के बीच विज्ञापन का समय बढ़ने की संभावना चिंता का विषय हो सकती है। करीब 20 साल पुराने इस नियम में बदलाव को टेलीविजन उद्योग के लिए बड़ा नियामकीय परिवर्तन माना जा रहा है।
Written By: Shivani Gupta