प्रकृति अपने अंदर ऐसे कई रहस्य समेटे हुए है, जिनके बारे में हम नहीं जानते है। जब ये रहस्य खुलते हैं, तो हम हैरान या चौंक जाते है। कुछ ऐसा ही एक रहस्य का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। जैसा की आप जान ही हैं कि इंसानों की तरह ही जीव-जंतु भी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं, लेकिन इनमें भी कौंवों का व्यवहार थोड़ा अनोखा और प्रभावशाली होता है। कहा जाता है कि जैसे जब कोई कौवा मर जाता है, तो उसके साथी उसके अगल-बगल इकट्ठा हो जाते हैं और तेज-तेज कांव-कांव की आवाज निकालते हैं। कई बार तो ये शोर नहीं, बल्कि उनका दुख व्यक्त करने का तरीका भी होता है।
कैसे होता है कौवों का अंतिम संस्कार
कई बार देखा जाता है कि एक कौवे के मरने के बाद तुरंत दूसरे कौंवे तेज-तेज आवाजें निकालकर अपने अन्य साथियों को इकट्ठा करते हैं। साथ ही कौवे अपने साथी की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए बाकायदा एक फ्यूनरल गैदरिंग करते हैं, जिसमें दर्जनों कौवे अपने मृत साथी के शरीर को घेर कर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं। इसे crow wake भी कहा जाता है।
अपने साथी की मौत पर गमगीन आवाज निकालते हैं कौवे
कौवों के किसी साथी की मृत्यु होने पर वे उसके आसपास एकत्रित होकर तेज और गंभीर स्वर में आवाजें निकालते हैं। पहली नजर में यह व्यवहार शोक या दुख व्यक्त करने जैसा प्रतीत होता है। लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार इसका प्रमुख उद्देश्य मृत्यु के कारण का पता लगाना और संभावित खतरे का आकलन करना होता है। यह सामूहिक व्यवहार पूरे समूह की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मृत साथी के शरीर का निरीक्षण करते हैं
जानकारी के अनुसार कौवे अपने मृत साथी के शरीर को चोंच से छूकर या ध्यानपूर्वक देखकर यह समझने का प्रयास करते हैं कि उसकी मृत्यु किसी चोट, बीमारी, विषैले पदार्थ या शिकारी के हमले के कारण हुई है या नहीं। इस निरीक्षण से उन्हें भविष्य के संभावित खतरों के बारे में जानकारी मिलती है।
पूरे समूह को खतरे से करते हैं सतर्क
यदि कौवों को आसपास किसी शिकारी बिल्ली, कुत्ते या अन्य खतरे का आभास होता है, तो वे विशेष प्रकार की चेतावनी भरी आवाजें निकालकर अपने पूरे समूह को सतर्क कर देते हैं। इसके बाद अन्य कौवे भी उस स्थान से दूरी बना लेते हैं या मिलकर खतरे का सामना करने की रणनीति अपनाते हैं।
खतरनाक स्थानों को लंबे समय तक याद रखते हैं
कौवों की स्मरण शक्ति अत्यंत विकसित होती है। वे उन स्थानों को लंबे समय तक याद रखते हैं जहां उन्हें किसी प्रकार का खतरा महसूस हुआ हो। भविष्य में वे ऐसे स्थानों से बचने का प्रयास करते हैं और अपने समूह के अन्य सदस्यों को भी सावधान रहने में मदद करते हैं।
इंसानों जैसी समझ रखने वाले कौवे
कौवों की बुद्धिमत्ता की तुलना कई बार उच्च विकसित जीवों से की जाती है। वे समस्याओं का समाधान निकालने, उपकरणों का उपयोग करने, चेहरों को पहचानने और परिस्थितियों के अनुसार अपने व्यवहार में बदलाव करने में सक्षम होते हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक उन्हें पक्षी जगत के सबसे बुद्धिमान जीवों में गिनते हैं।
Written By: Geeta Sharma