दुनिया के लगभग सभी देशों में एक समान प्रवृत्ति देखने को मिलती है कि महिलाएं औसतन पुरुषों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहती हैं। जनसांख्यिकीय आंकड़ों से पता चलता है कि 65 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा होती है और बढ़ती उम्र के साथ यह अंतर और स्पष्ट हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई जैविक, सामाजिक और जीवनशैली से जुड़े कारण जिम्मेदार हैं।
जोखिम लेने की प्रवृत्ति
वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार पुरुषों और महिलाओं के बीच जीवन प्रत्याशा का अंतर बचपन से ही दिखाई देने लगता है। लड़कों के मस्तिष्क का वह हिस्सा, जो निर्णय लेने और संभावित परिणामों का आकलन करने में मदद करता है, अपेक्षाकृत देर से परिपक्व होता है। इसके कारण युवावस्था में पुरुष अधिक जोखिम भरे व्यवहार की ओर आकर्षित हो सकते हैं, जिससे दुर्घटनाओं और हिंसक घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
पेशे से जुड़ा जोखिम
पुरुषों की कम औसत आयु का एक महत्वपूर्ण कारण उनका कार्यक्षेत्र भी माना जाता है। सेना, अग्निशमन सेवा, खनन, निर्माण कार्य और अन्य खतरनाक व्यवसायों में पुरुषों की भागीदारी अधिक होती है। ऐसे क्षेत्रों में दुर्घटनाओं और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की संभावना ज्यादा रहती है, जो जीवन प्रत्याशा को प्रभावित कर सकती है।
हृदय रोगों का बढ़ा खतरा
हृदय संबंधी बीमारियां भी पुरुषों और महिलाओं की औसत आयु में अंतर पैदा करने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं। पुरुषों में दिल की बीमारियों का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक देखा गया है। उच्च रक्तचाप, खराब कोलेस्ट्रॉल स्तर, धूम्रपान जैसी आदतें और समय पर स्वास्थ्य जांच न कराना इस खतरे को और बढ़ा सकते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां
मानसिक स्वास्थ्य के मामले में भी पुरुष अक्सर पीछे रह जाते हैं। कई पुरुष तनाव, चिंता या अवसाद जैसी समस्याओं के बावजूद सहायता लेने से बचते हैं। सामाजिक धारणाएं और भावनाओं को खुलकर व्यक्त न करने की प्रवृत्ति उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि आत्महत्या के मामलों में पुरुषों की संख्या कई देशों में महिलाओं से अधिक पाई जाती है।
सामाजिक संबंधों की भूमिका
महिलाओं के सामाजिक संबंध सामान्यतः अधिक मजबूत माने जाते हैं। परिवार, मित्रों और सामाजिक समूहों के साथ नियमित जुड़ाव मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी होता है। इसके विपरीत, सामाजिक अलगाव स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है और यह स्थिति पुरुषों में अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है।
अधिक जीवन प्रत्याशा का एक ही कारण नहीं
महिलाओं की अधिक जीवन प्रत्याशा केवल किसी एक कारण का परिणाम नहीं है। जैविक विशेषताएं, स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार, सामाजिक संबंध, मानसिक स्वास्थ्य और पेशेगत जोखिम जैसे कई कारक मिलकर इस अंतर को प्रभावित करते हैं। बेहतर स्वास्थ्य जागरूकता, नियमित जांच और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देकर पुरुष भी अपने जीवन की गुणवत्ता और आयु दोनों में सुधार कर सकते हैं।
Written By Toshi Shah