पृथ्वी पर जीवन का इतिहास लगभग 4.5 अरब वर्ष पुराना है, और इस लंबे समय में असंख्य जीव उत्पन्न हुए तथा विलुप्त हो गए। इन विलुप्त जीवों में विशालकाय सांपों का विशेष स्थान है, जिनका आकार और वजन आज के किसी भी जीव से तुलना में कहीं अधिक था। हाल के वर्षों में 2 प्रजातियां वासुकी, इंडिकस और टाइटेनोबोआ सेरेजोनेंसिस वैज्ञानिकों के बीच चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं, क्योंकि इन्हें अब तक के सबसे बड़े सांपों में गिना जाता है।
टाइटेनोबोआ सेरेजोनेंसिस पृथ्वी का सबसे विशाल सांप
टाइटेनोबोआ सेरेजोनेंसिस को लंबे समय तक पृथ्वी का सबसे विशाल सांप माना गया है। यह लगभग 58 से 60 मिलियन वर्ष पहले पेलियोसीन युग में वर्तमान कोलंबिया के दलदली क्षेत्रों में पाया जाता था। इसकी खोज 2009 में सेरेजोन कोयला खदानों में हुई थी। शुरुआत में इसके जीवाश्मों को मगरमच्छ का अवशेष समझा गया, लेकिन बाद में शोध से स्पष्ट हुआ कि यह एक विशाल सांप था। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसकी लंबाई लगभग 15 मीटर और वजन लगभग 1.25 टन तक था।
गुजरात में खोजा गया था वासुकी इंडिकस विशाल सांप
दूसरी ओर, भारत के गुजरात राज्य में खोजा गया वासुकी इंडिकस भी एक अत्यंत विशाल सांप था। इसके जीवाश्म 2005 में कच्छ क्षेत्र की पनाध्रो लिग्नाइट खदान में मिले थे। करीब नौ वर्षों के गहन अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने इसे एक नई प्रजाति के रूप में पहचाना। मध्य इओसीन युग का यह सांप भी लगभग 15 मीटर लंबा हो सकता था और इसका वजन लगभग 1 टन तक आंका गया है। इसका नाम हिंदू पौराणिक सर्प वासुकी के नाम पर रखा गया।
टाइटेनोबोआ है सबसे विषैला सांप
यदि तुलना की जाए, तो लंबाई के मामले में दोनों सांप लगभग समान थे, लेकिन वजन के आधार पर टाइटेनोबोआ थोड़ा आगे निकलता है। यही कारण है कि टाइटेनोबोआ को अब तक का सबसे भारी सांप माना जाता है। यह बोइडे परिवार से संबंधित था, जिसमें आज के बोआ और एनाकोंडा जैसे गैर-विषैले सांप शामिल हैं, जो अपने शिकार को जकड़कर मारते हैं।
पृथ्वी पर मौजूद हुआ करते थे विशाल सांप
इन दोनों विशाल सांपों की खोज हमें यह समझने में मदद करती है कि पृथ्वी पर कभी ऐसे जीव भी थे, जिनका आकार आज के बड़े वाहनों जितना था। ये न केवल विकास की चरम अवस्था को दर्शाते हैं, बल्कि उस समय के पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र की भी झलक देते हैं।
Written By: Geeta Sharma