नई दिल्ली: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET UG) परीक्षा को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर देश की सर्वोच्च अदालत ने विराम लगा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा अभ्यर्थियों को दिए गए ग्रेस मार्क्स को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद अब घोषित मेरिट लिस्ट में कोई बदलाव नहीं होगा।

पीठ ने दलीलों को माना आधारहीन
यह मामला जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि NTA द्वारा दिए गए ग्रेस अंक मनमाने ढंग से बांटे गए हैं, इसलिए इन्हें रद्द कर एक नई और संशोधित मेरिट सूची जारी की जानी चाहिए। दोनों पक्षों (याचिकाकर्ता और NTA) की लंबी बहस और तथ्यों की बारीकी से पड़ताल करने के बाद पीठ ने पाया कि याचिका में उठाए गए तर्क इतने ठोस नहीं हैं कि मौजूदा नतीजों में फेरबदल किया जाए।

क्या थी याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग?
अभ्यर्थियों का आरोप था कि परीक्षा में पूछे गए कई प्रश्नों के उत्तर NCERT की किताबों के तथ्यों से मेल नहीं खाते थे, फिर भी उम्मीदवारों को ग्रेस मार्क्स दिए गए। याचिका में मांग की गई थी कि ग्रेस अंकों को तुरंत निरस्त कर बिना ग्रेस मार्क्स के पारदर्शी तरीके से नई मेरिट लिस्ट जारी की जाए।

फैसले का छात्रों पर असर
इस फैसले से उन लाखों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है जो अपनी मौजूदा रैंक से संतुष्ट थे और काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। NTA द्वारा घोषित मौजूदा मेरिट लिस्ट ही अंतिम मानी जाएगी। जिन याचिकाकर्ताओं को संशोधन की उम्मीद थी, उनके लिए यह एक बड़ा झटका है।

विवाद पर लगा विराम
पिछले कई महीनों से NEET UG में ग्रेस मार्क्स का मुद्दा देशभर के मेडिकल अभ्यर्थियों के बीच चर्चा और विरोध प्रदर्शनों का कारण बना हुआ था। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद अब कानूनी लड़ाई खत्म हो गई है और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश/काउंसलिंग की आगे की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के पूरी हो सकेगी। 

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 Written By Shailesh Yadav