नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में 2020 में भड़के दंगे में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और अन्य सह-दोषियों के लिए दिल्ली पुलिस ने अदालत से फांसी की मांग की है। अदालत में बहस के दौरान अभियोजन पक्ष के वकील ने कहा कि दोषियों ने इस मामले में बहुत क्रूर और जघन्य तरीका अपनाया। इन लोगों ने सोची-समझी साजिश के तहत इस वारदात को अंजाम दिया। इस जघन्य हत्याकांड के लिए सिर्फ मौत की सजा होनी चाहिए।

आईबी अधिकारी की हुई थी हत्या

दिल्ली दंगा 2020 में आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या हुई थी। उनके शरीर पर 51 घाव के निशान मिले थे। उसे बड़ी बेरहमी से धारदार हथियार से मारकर एक नाले के पास फेंक दिया गया था। जब उनका शव मिला तो उनके शरीर पर सिर्फ अंडरवियर था।

दिल्ली पुलिस के वकील ने सजा पर बहस करते हुए अदालत में कहा कि वारदात के वक्त आरोपी कसाई  बन चुके थे। पुलिस ने इस हत्या को 'ठंडे दिमाग से की गई हत्या' (कोल्ड-ब्लडेड किलिंग) बताया।   

 पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 51 घाव के निशान

अदालत में पुलिस ने अंकित शर्मा पर की गई अत्यधिक बर्बरता का ब्योरा दिया। दिल्ली पुलिस ने अदालत को ये भी बताया कि अंकित शर्मा को बहुत ज्यादा यातना दी गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक उसके शरीर पर कुल 51 घाव थे। जिनमें 7 चोट के निशान ऐसे थे जो मौत के लिए काफी थे। 16 चोट के निशान ऐसे थे जो धारदार हथियार से किए गए थे।

गौरतलब है कि 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या मामले में अदालत ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन और चार अन्य को हत्या का दोषी ठहराया था।  

अपने फैसले में अदालत ने कहा कि ताहिर हुसैन हथियारों से लैस उस भीड़ का हिस्सा था जो हिंदुओं के प्रति नफरत की भावना के साथ दंगा, आगजनी और लूटपाट करने के लिए इकट्ठा हुई थी।

पूर्व पार्षद ताबिर हुसैन को आईपीसी की धाराओं 302, 365 (किसी व्यक्ति को गुप्त रूप से और गलत तरीके से कैद करने के इरादे से अपहरण या अगवा करना), 147 (दंगा करना), 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा करना), 153ए (दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 188 के तहत दोषी ठहराया गया था, साथ ही धारा 149 (गैर-कानूनी भीड़) भी लागू की गयी थी।

 

प्रदीप सिंह