Saudi Arabia-Iraq Attack: पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। बता दें कि यहां की स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब सऊदी अरब और अमेरिकी सेना ने संयुक्त रूप से इराक में मौजूद ईरान समर्थित उग्रवादी गुटों के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर जवाबी हवाई हमले किए। सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हुए लगातार ड्रोन हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई है। इस कदम के बाद क्षेत्र में व्यापक युद्ध भड़कने की आशंका काफी बढ़ गई है।

72 घंटे में 30 से अधिक ड्रोन हमले
सऊदी अरब के अनुसार, पिछले 72 घंटों के भीतर उसके महत्वपूर्ण तेल ठिकानों को निशाना बनाकर 30 से अधिक ड्रोन हमले करने की कोशिश की गई थी। इसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) और सऊदी वायुसेना ने इराक में ईरान समर्थक उग्रवादियों के हथियार और लॉजिस्टिक्स ठिकानों पर सटीक हमले किए। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उसने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत अपने 'आत्मरक्षा के अधिकार' का प्रयोग करते हुए यह कार्रवाई की है।

रियाद की ईरान को सख्त चेतावनी
इस सैन्य कार्रवाई के साथ ही सऊदी अरब ने ईरान को कड़ा संदेश दिया है. सऊदी रक्षा मंत्री ने बयान जारी कर कहा कि हालांकि वे क्षेत्र में तनाव बढ़ाना नहीं चाहते, लेकिन तेल ठिकानों पर आगे किसी भी हमले का सख्त और माकूल जवाब दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि बीते फरवरी महीने से ही जारी तनाव के बीच सऊदी अरब और ईरान के बीच यह अब तक की सबसे बड़ी सीधी तनातनी मानी जा रही है।

कूटनीति को दिया एक मौका
वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उसके सहयोगी गुटों को तुरंत हमले रोकने की चेतावनी दी है। इस दौरान उन्होंने बताया कि ईरान पर सीधे हमले रोक रखे हैं ताकि कूटनीति को एक मौका दिया जा सके। यदि बातचीत बेनतीजा रही, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स और बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने में जरा भी संकोच नहीं करेगा।

कूटनीतिक प्रयास और 'मलक्का मॉडल' की चर्चा
एक तरफ जहां सैन्य कार्रवाई जारी है, वहीं दूसरी तरफ शांति समझौते की कोशिशें भी तेज हो गई हैं. कतर, पाकिस्तान और ओमान की अगुआई में मध्यस्थ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और समझौता कराने का प्रयास कर रहे हैं। ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी ने ईरान, कतर, सऊदी अरब, कुवैत और मिस्र के विदेश मंत्रियों से फोन पर चर्चा की है। सूत्रों के अनुसार, समुद्री सुरक्षा के लिए एक प्रस्ताव पर विचार हो रहा है। इसके तहत ईरान और ओमान जैसे देश 'मलक्का स्ट्रेट मॉडल' की तर्ज पर जहाजों से समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसी खास सेवाओं के लिए सर्विस टैक्स वसूल सकते हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर हो रहे हमले और आरोप-प्रत्यारोप यह संकेत दे रहे हैं कि इस संकट का तुरंत समाधान होना फिलहाल आसान नहीं है। 

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Written By Shailesh Yadav