UP Politics: आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले देश की सियासत में नया राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। लोकसभा में परीक्षा संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के समर्थकों के लिए 'भक्त' (अंधभक्त) शब्द के प्रयोग को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। बीजेपी इस बयान को राजनीतिक हथियार बनाकर अपने कोर वोटर बेस को एकजुट करने में जुट गई है, वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) द्वारा कांग्रेस का खुला समर्थन करने पर राजनीतिक गलियारों में 'सेल्फ गोल' की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
संसद में क्या हुआ?
लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर बोलते हुए राहुल गांधी ने छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए 'अंधभक्त' शब्द का प्रयोग किया। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस शब्द पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे असंसदीय करार दिया और स्पीकर ओम बिरला से इसे कार्यवाही से हटाने (Expunge करने) का अनुरोध किया। बता दें कि राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि गृहमंत्री अमित शाह के आदेश पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई की गई। इस पर किरेन रिजिजू ने चुनौती दी कि अगर उनके पास गृहमंत्री के आदेश का कोई लिखित सबूत है, तो उसे सदन के पटल पर रखें। सत्तापक्ष की ओर से माफी की मांग पर अड़े रहने और हंगामे के बीच राहुल गांधी ने अपना भाषण बीच में ही समाप्त कर दिया।
'सहानुभूति' या 'सेल्फ गोल'?
सदन के भीतर और बाहर समाजवादी पार्टी ने राहुल गांधी का खुलकर बचाव किया. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष कोई गंभीर आरोप लगा रहे हैं, तो सरकार को पल्ला झाड़ने के बजाय निष्पक्ष जांच कराकर रिपोर्ट सदन में रखनी चाहिए। सपा सांसद ने आरोप लगाया कि देश के शिक्षण संस्थानों और मंत्रालयों में संघ (RSS) से जुड़े लोगों को बैठाया जा रहा है और सरकार छात्रों के सवालों से भाग रही है। विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में जहां सपा अपना स्वतंत्र 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण मजबूत कर रही थी, वहां राहुल गांधी के विवादास्पद बयानों का पूरी तरह समर्थन करना सपा के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।
'भक्त' शब्द से वोटरों का ध्रुवीकरण
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी और हिंदूवादी संगठनों ने राहुल गांधी के बयान को भुनाना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि बीजेपी से नाराज चल रहे कुछ कैडर या पारंपरिक मतदाताओं को राहुल गांधी के इस बयान के जरिए भावनात्मक रूप से लामबंद किया जाएगा। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता विनोद बंसल ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस झूठ की पर्याय बन चुकी है और देश के लोगों तथा बजरंग दल का अपमान करना उनकी आदत बन गई है।
पक्षरणनीति व प्रभाव
बीजेपी (BJP)समर्थकों के स्वाभिमान से जोड़कर 'भक्त' बयान का आक्रामक प्रचार करेगी ताकि चुनावी ध्रुवीकरण तेज हो सके। कांग्रेस (Congress)युवाओं और छात्रों के मुद्दों (पेपर लीक/रोजगार) को केंद्र में रखकर सरकार को घेरने की कोशिश जारी रखेगी। सपा (SP)कांग्रेस का साथ देकर इंडिया गठबंधन की एकजुटता तो दिखा रही है, लेकिन बीजेपी के हिंदुत्व पिच पर फंसने का खतरा बना हुआ है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, राहुल गांधी द्वारा नीतिगत मुद्दों के बजाय ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से बीजेपी को अपनी अनुकूल राजनीतिक पिच पर खेलने का सीधा मौका मिल गया है। यूपी चुनाव में इसका कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में अभियानों के रुख से साफ होगा।
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Written By Shailesh Yadav