नई दिल्ली: वंदे मातरम की दो कड़ियों के पाठ को लेकर चल रहे विवाद के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह खुद को सरदार वल्लभभाई पटेल, महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सी. राजगोपालाचारी जैसे नेताओं से भी बड़ा समझते हैं।

न्यूज एजेंसी से बातचीत में पवन खेड़ा ने कहा कि अमित शाह संविधान सभा के फैसले के खिलाफ बोल रहे हैं और उन्होंने खुद को डॉ. भीमराव अंबेडकर से भी ऊपर रखने की कोशिश की है।

खेड़ा ने कहा, “क्या इसका मतलब यह है कि अमित शाह अब खुद को सरदार पटेल, महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सी. राजगोपालाचारी से बड़ा मानते हैं? वह संविधान सभा के खिलाफ बोल रहे हैं और खुद को डॉ. अंबेडकर से भी ऊपर रख रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि संविधान सभा में देश की अलग-अलग विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग शामिल थे और वहीं वंदे मातरम की स्थिति को भी समर्थन और मंजूरी मिली थी।

जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल

पवन खेड़ा ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने अमित शाह की संसद में अनुपस्थिति पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि गृह मंत्री को यह तक पता नहीं है कि प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया।

खेड़ा ने कहा कि या तो गृह मंत्री इतने अक्षम हैं कि उन्हें आदेश देने वाले व्यक्ति की जानकारी नहीं है, या फिर वह जानते हैं क्योंकि आदेश उन्होंने खुद दिया था।

RSS और हिंदू महासभा पर भी लगाया आरोप

कांग्रेस नेता ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और हिंदू महासभा पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन संगठनों ने पाकिस्तान के निर्माण में भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संविधान और संविधान सभा की बात करती है तथा 1937 के उस प्रस्ताव का हवाला देती है, जिसमें सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी जैसे नेता शामिल थे।

कांग्रेस ने दो कड़ियां गाने का फैसला किया

दरअसल, बुधवार को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने फैसला किया कि पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम की केवल पहली दो कड़ियां गाई जाएंगी। कांग्रेस ने इसके लिए 1937 में लिए गए पार्टी के प्रस्ताव का हवाला दिया।

यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब बीजेपी ने आरोप लगाया कि 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम के गायन के समय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी की संसदीय अध्यक्ष सोनिया गांधी आपस में बातचीत कर रहे थे। बीजेपी ने दोनों से सार्वजनिक माफी की मांग की थी।

CWC की बैठक के बाद कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा था कि वंदे मातरम के पाठ को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट है और वह 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा लिए गए फैसलों का पालन करेगी।

अमित शाह ने कांग्रेस पर लगाया तुष्टिकरण का आरोप

कांग्रेस के फैसले की आलोचना करते हुए अमित शाह ने गुरुवार को आरोप लगाया कि पार्टी अपनी “चरम तुष्टिकरण की नीति” को फिर से आगे बढ़ा रही है।

शाह ने कहा कि केवल दो कड़ियां गाने का फैसला महज प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह उस ऐतिहासिक गलती को दोहराने जैसा है, जिसने भारत के विभाजन का रास्ता तैयार करने में योगदान दिया।

उन्होंने दावा किया कि 1937 में मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए कांग्रेस ने वंदे मातरम को दो हिस्सों में बांटा और इसके बाद दो-राष्ट्र सिद्धांत को बल मिला, जिसके परिणामस्वरूप देश का विभाजन हुआ और पाकिस्तान अस्तित्व में आया।

अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने वंदे मातरम की रचना के 150वें वर्ष में इस ऐतिहासिक गलती को सुधारने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी कार्यक्रमों में पूरे वंदे मातरम के गायन को कानूनी रूप भी दिया गया है।

यह भी पढ़ें: पीएम केयर्स फंड को लेकर खरगे का पीएम मोदी पर निशाना, पूछा- ‘आपातकालीन फंड में हजारों करोड़ जमा होने का क्या औचित्य?’

शाह ने कांग्रेस के फैसले को वोट बैंक की राजनीति और तुष्टिकरण से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि इससे न केवल बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर रचना का अपमान हुआ है, बल्कि उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों का भी अपमान हुआ है जिन्होंने ‘वंदे मातरम’ का उद्घोष करते हुए बलिदान दिया और जेलों में वर्षों बिताए।

Written By: Pradeep Singh