मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच भारत और पड़ोसी देश पाकिस्तान की करेंसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। गुरुवार, 9 अप्रैल को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले हल्की गिरावट के साथ 92.66 पर खुला। वहीं, पाकिस्तानी रुपये की हालत काफी खस्ता नजर आ रही है। आइए जानते हैं कि आखिर दोनों देशों की करेंसी में कितना बड़ा अंतर है और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट इस पर क्या कहती है।
भारतीय रुपये की ताज़ा स्थिति
ईरान और मिडिल ईस्ट में मचे घमासान का असर भारतीय रुपये पर भी देखने को मिल रहा है। गुरुवार को डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 92.66 के स्तर पर खुला। बाजार के जानकारों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई है, उसकी वजह से निवेशकों में डर है। हालांकि, भारतीय रुपया पिछले कुछ दिनों से ऊपर-नीचे हो रहा है, लेकिन दुनिया की अन्य मुद्राओं के मुकाबले यह अभी भी मजबूती से टिका हुआ है।
पाकिस्तानी रुपये का हाल
अगर हम सरहद पार पाकिस्तान की बात करें, तो वहां की करेंसी 'रुपी' लगातार गोता लगा रही है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, एक अमेरिकी डॉलर की कीमत पाकिस्तान में 279.02 रुपये तक पहुँच गई है। यह आंकड़ा साफ़ दर्शाता है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बाहरी कर्ज और अंदरूनी संकट का कितना बुरा असर पड़ा है। डॉलर के मुकाबले पाकिस्तान की करेंसी बेहद कमजोर स्थिति में खड़ी है।
दोनों देशों की करेंसी में सीधा मुकाबला
जब हम भारत और पाकिस्तान की करेंसी की आपस में तुलना करते हैं, तो भारत बहुत आगे नजर आता है। आज की तारीख में 1 भारतीय रुपया, पाकिस्तान के लगभग 3 रुपयों के बराबर है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर किसी पाकिस्तानी नागरिक को भारत से कोई सामान खरीदना हो, तो उसे अपनी जेब से तीन गुना ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक नीतियां इसे पाकिस्तान से कहीं ज्यादा मजबूत बनाती हैं।
महंगाई और कर्ज के जाल में फंसा पाकिस्तान
पाकिस्तान इस समय दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ आसमान छूती महंगाई है और दूसरी तरफ कर्ज का भारी बोझ। मार्च के महीने में पाकिस्तान में महंगाई ने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। हालत यह है कि अब कोई नया देश या संस्था पाकिस्तान को कर्ज देने के लिए आसानी से तैयार नहीं हो रही है। इस आर्थिक तंगी ने वहां के आम आदमी की कमर तोड़ दी है।
मिडिल ईस्ट के तनाव का असर
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध जैसे हालातों ने तेल की सप्लाई पर बुरा असर डाला है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा पाकिस्तान को भुगतना पड़ रहा है क्योंकि उसके पास तेल खरीदने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा नहीं है। वहां पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत हो गई है और लोगों को लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है। वहीं भारत अपनी सूझबूझ और मजबूत डिप्लोमेसी के कारण इस संकट को बेहतर तरीके से संभाल रहा है।
Written by: Anushka sagar