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PM Modi Karnataka Visit: पीएम मोदी ने बुधवार, 15 अप्रैल को कर्नाटक के मंड्या जिले में स्थित अदिचुंचनगिरि में भव्य श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का उद्घाटन किया। यह मंदिर अदिचुंचनगिरि महासंस्थान मठ के 71वें पीठाधिपति श्री श्री श्री डॉ. बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी की स्मृति में निर्मित एक भव्य स्मारक है। लगभग 80 करोड़ रुपये की लागत से बना यह मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।
#WATCH | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के मांड्या में श्री क्षेत्र आदिचुंचनगिरी में श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का उद्घाटन किया।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 15, 2026
श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर, श्री आदिचुंचनगिरी महासंस्थान मठ के 71वें पादरी श्री श्री श्री डॉ. बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी को समर्पित एक स्मारक है। pic.twitter.com/OBPhYgaCK3
मंदिर क्यों है खास?
श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर पिछले 10 वर्षों से निर्माणाधीन था और अब पूर्ण रूप से तैयार होकर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी अद्वितीय वास्तुकला के कारण भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। इसमें होयसला, चालुक्य, चोल और गंगा काल की मूर्तिकला का सुंदर समावेश देखने को मिलता है, जो भारतीय शिल्पकला की समृद्ध विरासत को दर्शाता है। मंदिर का निर्माण वर्तमान पीठाधिपति निर्मलानंदनाथ स्वामीजी के मार्गदर्शन में हुआ है। जो इसे अपने गुरु को समर्पित एक भव्य श्रद्धांजलि के रूप में देखते हैं। इसकी नक्काशी, विशाल संरचना और पारंपरिक शैली इसे दक्षिण भारत के प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में शामिल करती है।
जानें कौन हैं गुरु भैरवैक्य
बता दें, भैरवैक्य शब्द का अर्थ है भैरव में लीन होना या भैरव के साथ एकत्व पाना है। यह मंदिर क्षेत्र की प्राचीन शैव परंपरा से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर को भगवान भैरव को शिव का गण माना जाता है। पीएम ने यहां पूजा अर्चना की। ये मंदिर श्री श्री श्री बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी की पावन स्मृति में निर्मित किया गया है, जो आदिचुंचनगिरी मठ के 71वें पीठाधीश्वर थे। बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी को उनके व्यापक समाजसेवा कार्यों के लिए जाना जाता है।
बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी का इतिहास
श्री श्री श्री डॉ. बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी का जन्म 1945 में कर्नाटक में हुआ था। बचपन से ही उनका झुकाव आध्यात्मिकता, सेवा और अनुशासित जीवन की ओर था। कम उम्र में ही वह आदिचुंचनगिरी महासंस्थान मठ से जुड़ गए और गुरु-शिष्य परंपरा के तहत शिक्षा व साधना प्राप्त की। उनके नेतृत्व में मठ ने केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि शैक्षिक और सामाजिक क्षेत्रों में भी व्यापक विस्तार किया।
'मैसूर पगड़ी' बनी आकर्षण का केंद्र
प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे के लिए विशेष मैसूर पगड़ी भी तैयार की गई, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। इस पगड़ी को मैसूर के कलाकार नंदन सिंह ने पांच दिनों में तैयार किया। यह पगड़ी नलवाड़ी कृष्णराज वाडियारकी शैली से प्रेरित है और बनारसी कपड़े से बनाई गई है। इसमें पारंपरिक गंधभेरुंडा डिजाइन उकेरा गया है। इसे नम्मुर नम्मारु संस्था की ओर से प्रधानमंत्री को भेंट किया गया।
Writen By: Geeta Sharma















