
बिहार के मोतिहारी में अप्रैल महीने में जहरीली शराब पीने से 10 लोगों की मौत के मामले में मद्य निषेध विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय जांच में लापरवाही सामने आने के बाद 14 कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। निलंबित कर्मचारियों को मुजफ्फरपुर, सहरसा और भागलपुर स्थित मद्य निषेध ग्रुप सेंटर में अटैच कर रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।
दरभंगा डिवीजन के उपायुक्त ने की जांच
राज्य मुख्यालय पटना के आदेश पर दरभंगा डिवीजन के उपायुक्त ने पूरे मामले की जांच की। जांच रिपोर्ट में कई अधिकारियों और कर्मियों की गंभीर लापरवाही उजागर हुई। रिपोर्ट मिलते ही विभाग ने संबंधित कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
क्या था मामला?
अप्रैल की शुरुआत में मोतिहारी जिले के तुरकौलिया और रघुनाथपुर इलाके में कथित तौर पर जहरीले स्प्रिट से बनी अवैध शराब पीने के बाद कई लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। सभी को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन 10 लोगों की जान नहीं बच सकी। घटना के बाद राज्यभर में अवैध शराब के कारोबार और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल उठे थे। इसके बाद राज्य मुख्यालय ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए थे।
जांच में क्या सामने आया?
दरभंगा डिवीजन की जांच में यह पाया गया कि जनवरी से मार्च के बीच संबंधित क्षेत्रों में अवैध शराब के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई दर्ज नहीं की गई थी। इसे विभागीय स्तर पर बड़ी लापरवाही माना गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर निरीक्षक स्तर के अधिकारी मनीष सर्राफ, धर्मेंद्र कुमार, मो. सेराज, अवर निरीक्षक मुकेश कुमार, उदय कुमार, नागेश कुमार और धर्मेंद्र झा समेत कई कर्मियों को निलंबित किया गया। इसके अलावा सहायक अवर निरीक्षक स्तर के धर्मेंद्र कुमार सिंह, बसंत कुमार महतो, कवींद्र कुमार, रंजीत कुमार, अजय कुमार, शशि ऋषि और रोशनी कुमारी पर भी कार्रवाई की गई। विभागीय आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सभी निलंबित कर्मियों को मुजफ्फरपुर, सहरसा और भागलपुर के मद्य निषेध ग्रुप सेंटर में योगदान देना होगा। घटना के बाद यह सवाल लगातार उठ रहा है कि यदि समय रहते अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई की जाती, तो 10 लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
Written By Toshi Shah















