अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और संघर्ष अब समाप्ति की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों ने एक महत्वपूर्ण शांति समझौते पर सहमति बनने का दावा किया है, जिससे पश्चिम एशिया में स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस घटनाक्रम का स्वागत दुनिया के कई देशों ने किया है, जिनमें भारत भी शामिल है।

पीएम ने अमेरिका-ईरान के शांति वार्ता का किया स्वागत

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के कारण विश्व अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ा था और कई देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि इस समझौते के लागू होने से क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा व्यापार और आवागमन की स्वतंत्रता बहाल होगी। साथ ही उन्होंने शेष मुद्दों के समाधान के लिए निरंतर बातचीत की आवश्यकता पर बल दिया।

ईरान के साथ समझौते पर बोले ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से दावा किया कि ईरान के साथ समझौता हो गया है। दूसरी ओर, ईरान की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कई महीनों तक चली कठिन और जटिल वार्ताओं के बाद दोनों देशों ने युद्धविराम संबंधी समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दे दिया है।

14 प्रमुख शर्तों पर सहमत हुए अमेरिका और ईरान

ट्रम्प के अनुसार, इस समझौते के तहत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होरमुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोला जाएगा। साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों पक्ष 14 प्रमुख शर्तों पर सहमत हुए हैं और 19 जून को Geneva में औपचारिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

14 शर्तों में क्या लिखा है?

एक रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित 14 शर्तों में तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों को हटाना, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देना और अरबों डॉलर की राशि जारी करना शामिल है। इन कदमों को दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव न केवल पश्चिम एशिया बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

Written By: Geeta Sharma