Prediabetes Symptoms and Causes:  आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम की व्यस्तता के चलते अपनी सेहत पर ध्यान नहीं दे पाते। नतीजा इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर दिखने लगता है और कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इन्हीं में से एक है डायबिटीज, जो आज तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। हालांकि, इस बीमारी के होने से पहले शरीर कुछ संकेत देता है, जिन्हें समय रहते पहचान लिया जाए तो डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस शुरुआती अवस्था को प्रीडायबिटीज (Prediabetes) कहा जाता है।

कैसे पता करें टाइप-2 डायबिटीज के बारे में 

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, प्रीडायबिटीज ऐसी स्थिति है, जिसमें ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन इतना नहीं कि उसे टाइप-2 डायबिटीज माना जाए। हालांकि यदि समय रहते खानपान और जीवनशैली में जरूरी बदलाव नहीं किए गए, तो आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज होने की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए शरीर के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच कराना और जरूरी सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं प्रीडायबिटीज के लक्षण, इसके प्रमुख कारण और इससे बचाव के आसान उपाय।

प्रीडायबिटीज के लक्षण

बार-बार प्यास लगना
बार-बार पेशाब आना
जल्दी थकान महसूस होना
धुंधला दिखाई देना
भूख अधिक लगना
वजन बढ़ना, खासकर पेट के आसपास
गर्दन, बगल या कोहनी के आसपास त्वचा का काला पड़ना
घाव का धीरे भरना

प्रीडायबिटीज के कारण

ज्यादा मीठा, कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड फूड मैदा, सफेद ब्रेड, पेस्ट्री, तली हुई चीजों का सेवन
लंबे समय तक बैठकर काम करना
अधिक वजन या मोटापा
अगर आपके परिवार में किसी को पहले से ही समस्या हो तो
35–40 वर्ष के बाद जोखिम अधिक माना जाता है।
तनाव और नींद की कमी

अन्य कारण

हाई ब्लड प्रेशर
हाई कोलेस्ट्रॉल
महिलाओं में PCOS की समस्या

प्रीडायबिटीज से बचाव

रोज 30–45 मिनट तेज चाल से चलें या व्यायाम करें।
अपने डाइट में सब्जियां और फाइबर बढ़ाएं।
चीनी, मीठे पेय और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें।
अपने वजन को कंट्रोल रखें। 5–7% वजन कम करना भी जोखिम को काफी घटा सकता है।
रोज 7–8 घंटे की नींद लेने की कोशिश करें।
तनाव कम करें। हर 6–12 महीने में ब्लड शुगर की जांच कराएं।

प्रीडायबिटीज शरीर की एक ऐसी शुरुआती चेतावनी है, जिसे नजरअंदाज करना आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज जैसी गंभीर समस्या का कारण बन सकता है। यदि बार-बार प्यास लगना, थकान, वजन बढ़ना या त्वचा का काला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो समय रहते ब्लड शुगर की जांच कराना जरूरी है। हालांकि अच्छी बात यह है कि संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित करके प्रीडायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

 Written By: Geeta Sharma