ईद उल-फितर इस्लाम धर्म का एक बेहद पवित्र और खुशियों भरा पर्व है, जो रमजान के पूरे महीने रोज़ा रखने के बाद मनाया जाता है। यह त्योहार नए चांद (शव्वाल महीने की शुरुआत) के दिखाई देने पर शुरू होता है। “ईद” का अर्थ है खुशी और “उल-फितर” का मतलब है रोज़ा खोलना। इसे रोज़ा पूरा करने की खुशी में मनाया जाता है और इस दिन मुसलमान अल्लाह का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने उन्हें रोज़ा निभाने की शक्ति दी।
मनाई जाती हैं दो प्रमुख ईद
इस्लामी कैलेंडर (हिजरी) में दो प्रमुख ईदें मनाई जाती हैं। पहली ईद-उल-फितर है, जो रमजान के अंत में आती है, और दूसरी ईद-उल-अजहा है, जो जिलहिज्जा महीने की 10, 11 और 12 तारीख को मनाई जाती है।
ईद-उल-फितर कितने दिन तक रहती है?
आम तौर पर ईद-उल-फितर एक दिन का त्योहार है और इसे शाव्वाल के पहले दिन मनाया जाता है। इस दिन मुसलमान ईद की नमाज़ अदा करते हैं। कई देशों में यह जश्न 2–3 दिनों तक चलता है, जिसमें छुट्टियां रहती हैं और परिवार एवं दोस्तों के साथ मिलकर खुशियां मनाई जाती हैं। ईद-उल-अजहा इसके विपरीत तीन दिन तक मनाई जाती है।
ईद पर क्या करें?
ईद की नमाज़ पढ़ें
मस्जिद या ईदगाह में जाकर सामूहिक नमाज़ अदा करें और अल्लाह का शुक्रिया अदा करें।
रास्ता बदलें
सुन्नत के अनुसार नमाज़ के लिए जाते समय और वापस लौटते समय अलग रास्ता अपनाना शुभ माना जाता है।
साफ-सुथरे कपड़े पहनें
इस दिन साफ-सुथरे और नए कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
तोहफे और मुबारकबाद दें
अपने परिवार और दोस्तों को “ईद मुबारक” कहें और गले मिलकर खुशियां बांटें।
दुआ और इबादत करें
अल्लाह से दुआ करें और अधिक इबादत करें, क्योंकि यह दिन खास बरकत वाला होता है।
ईद-उल-फितर की कहानी
ईद-उल-फितर की परंपरा की शुरुआत पैगंबर हज़रत मुहम्मद ने 624 ईस्वी में मदीना में की थी। यह हिजरत के बाद का दूसरा साल था जब मुसलमानों ने पहला रमजान पूरा किया था, उन्होंने देखा कि लोग दो खास अवसरों पर जश्न मनाते हैं और इसके बाद उन्होंने मुसलमानों को बताया कि उनके लिए दो ईदें होंगी—ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा।
Written By Toshi Shah