भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, प्रदूषण को लेकर बढ़ती जागरूकता और सरकार की ईवी को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के चलते बड़ी संख्या में लोग अब इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ओर रुख कर रहे हैं। जुलाई 2026 के ताजा वाहन पंजीकरण आंकड़े भी इसी बदलाव की ओर इशारा करते हैं। इस महीने देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, सभी कंपनियों के लिए यह महीना समान रूप से शानदार नहीं रहा।
बढ़त तो हुई, लेकिन रफ्तार अभी सीमित
बता दें कि हालिया आंकड़ों में बिक्री बढ़ने के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि इसे इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में बड़ी क्रांति कहना अभी जल्दबाजी होगी। उनका कहना है कि फिलहाल बाजार धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और आने वाले महीनों में ही यह स्पष्ट होगा कि यह तेजी कितनी स्थायी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस बढ़ती मांग का सबसे ज्यादा फायदा किस कंपनी और किस सेगमेंट को मिला।
टाटा मोटर्स ने फिर दिखाई ताकत
बता दें कि इलेक्ट्रिक कार बाजार में टाटा मोटर्स ने एक बार फिर अपनी मजबूत स्थिति साबित की है। जुलाई 2026 में कंपनी ने 13,583 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल की तुलना में करीब 102 प्रतिशत अधिक है। कंपनी की पंच ईवी, नेक्सॉन ईवी और टियागो ईवी को ग्राहकों से लगातार अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। यही वजह है कि भारतीय ईवी बाजार में टाटा की हिस्सेदारी सबसे अधिक बनी हुई है।
महिंद्रा दूसरे और एमजी तीसरे स्थान पर
बिक्री के मामले में महिंद्रा एंड महिंद्रा दूसरे नंबर पर रही। कंपनी ने जुलाई 2026 के दौरान 7,677 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 125 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाती है। वहीं, तीसरे स्थान पर जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर रही। कंपनी ने इस महीने 5,642 यूनिट्स बेचीं। हालांकि, पिछले साल के मुकाबले उसकी बिक्री में करीब 4 प्रतिशत की हल्की गिरावट दर्ज की गई।
पूरे साल बिक्री में रहा उतार-चढ़ाव
अगर 2026 के अब तक के बिक्री आंकड़ों पर नजर डालें तो बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जनवरी में 7,501 यूनिट्स की बिक्री हुई थी, जो फरवरी में घटकर 5,472 यूनिट्स रह गई। इसके बाद बाजार ने धीरे-धीरे वापसी की और मार्च में 8,213, अप्रैल में 8,272, मई में 9,585 तथा जून में 10,583 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री दर्ज की गई। जुलाई में यह आंकड़ा बढ़कर 11,365 यूनिट्स तक पहुंच गया, जो इस साल का अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है। यह जुलाई 2025 की 9,839 यूनिट्स की बिक्री की तुलना में लगभग 15.5 प्रतिशत अधिक है।
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नई ईवी नीति का पूरा असर अभी आना बाकी
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी नई सरकारी नीति का असर समझने के लिए सिर्फ एक महीने के आंकड़े पर्याप्त नहीं होते। उनका कहना है कि सब्सिडी और सरकारी प्रोत्साहन से ग्राहकों की रुचि जरूर बढ़ी है, लेकिन वास्तविक तस्वीर आने वाले कुछ महीनों के आंकड़ों से ही सामने आएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों की दीर्घकालिक सफलता केवल छूट और सब्सिडी पर निर्भर नहीं करेगी। इसके लिए देशभर में चार्जिंग स्टेशनों का मजबूत नेटवर्क, वाहनों की पर्याप्त उपलब्धता और ग्राहकों का भरोसा भी उतना ही जरूरी है। सरकार को उम्मीद है कि आगामी त्योहारी सीजन के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में और तेजी देखने को मिल सकती है।
Written By Toshi Shah