Sawan 2026: भगवान शिव का अत्यंत प्रिय महीना 'सावन' 30 जुलाई से प्रारंभ हो चुका है। बता दें कि सावन के पवित्र माह में महादेव के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। शिव जी का अर्धनारीश्वर स्वरूप अत्यंत दिव्य, भव्य और कल्याणकारी माना गया है। हालांकि, बहुत कम लोग यह जानते हैं कि भगवान शिव ने आधा पुरुष और आधा स्त्री का यह रूप किसके दुखों को दूर करने के लिए धारण किया था।
सृष्टि विस्तार को लेकर ब्रह्मा जी की चिंता
शिव पुराण की कथा के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में जब सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी द्वारा रची गई सृष्टि का विस्तार नहीं हो पा रहा था, तब वे अत्यंत दुखी हुए। उसी समय आकाशवाणी हुई कि ब्रह्मन! अब मैथुनी सृष्टि (वंश-वृद्धि पर आधारित सृजन) करो। यानी आकाशवाणी सुनकर ब्रह्मा जी मैथुनी सृष्टि के विचार में तो लग गए, लेकिन उस समय तक नारी कुल का प्राकट्य ही नहीं हुआ था।
ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या
ब्रह्मा जी को ज्ञान हुआ कि भगवान शिव की कृपा के बिना नारी कुल का प्राकट्य संभव नहीं है और उनकी कृपा पाने का एकमात्र मार्ग तपस्या है। इसके बाद ब्रह्मा जी भगवान शिव के ध्यान में लीन हो गए। ब्रह्मा जी के तीव्र और कठिन तप से प्रसन्न होकर महादेव उनके समक्ष अर्धनारीश्वर स्वरूप में प्रकट हुए। ब्रह्मा जी ने देखा कि एक ही शरीर के आधे हिस्से में भगवान शिव और आधे हिस्से में पराशक्ति (माता पार्वती) विद्यमान थीं।
माता पार्वती और शिव जी से वरदान
ब्रह्मा जी ने अर्धनारीश्वर रूप को नमन करते हुए प्रार्थना की. ब्रह्मा जी ने कहा कि हे माते! जगत की उत्पत्ति और स्त्री जाति की रचना के लिए मुझे सामर्थ्य प्रदान करें। उन्होंने वरदान मांगा कि जगज्जननी मां पार्वती उनके पुत्र राजा दक्ष की कन्या के रूप में जन्म लेकर उनकी मनोकामना पूर्ण करें। माता पार्वती ने 'तथास्तु' कहकर ब्रह्मा जी की प्रार्थना स्वीकार की और राजा दक्ष के घर जन्म लेने का वर प्रदान किया। इसके पश्चात ब्रह्मा जी ने सुगमता से सृष्टि की रचना आगे बढ़ाई।
अर्धनारीश्वर कथा सुनने का महत्व
हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, सावन माह में जो भी श्रद्धालु भगवान शिव के अर्धनारीश्वर अवतार की कथा को पढ़ता या सुनता है, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे अंत में भगवान शिव के चरणों में स्थान (मोक्ष) प्राप्त होता है।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक ग्रंथों पर आधारित हैं। विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या ज्योतिषाचार्य से परामर्श लें।
Written By Shailesh Yadav