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शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे से पहले मानवाधिकार संगठनों की बड़ी मांग, कैदियों की रिहाई समेत रखीं कई शर्तें

Shailesh Yadav · 17 सितम्बर 2026
Xi Jinping US Visit

Xi Jinping US Visit: चीनी राष्ट्रपति और कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव शी जिनपिंग के 24 सितंबर 2026 को प्रस्तावित वॉशिंगटन दौरे से पहले मानवाधिकार, लोकतंत्र और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े कई संगठनों ने चीन से मानवाधिकारों को लेकर कई कदम उठाने की मांग की है। 16 सितंबर को जारी एक संयुक्त खुले पत्र में संगठनों ने राजनीतिक कैदियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की रिहाई, कथित अंतरराष्ट्रीय दमन को रोकने और कानूनी सुधारों की दिशा में प्रतिबद्धता जताने की अपील की है।

कैदियों की तत्काल रिहाई की मांग
संगठनों ने शी जिनपिंग से उन लोगों को तत्काल और बिना शर्त रिहा करने की मांग की है, जिन्हें वे 'प्रिजनर्स ऑफ कॉन्शियंस', मानवाधिकार रक्षक या मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोग बताते हैं। पत्र में ऐसे कई लोगों के नाम भी शामिल हैं, जिनकी रिहाई के लिए अमेरिकी सांसदों की ओर से भी मांग किए जाने का उल्लेख किया गया है। सूची में गुलशन अब्बास, एकपार असत, चो हांग-तुंग, राहिले दावुत, डिंग जियाक्सी, डोंग युयू, जिमी लाई, इल्हाम तोहती, पादरी वांग यी समेत कई अन्य नाम शामिल हैं।

तिब्बत और शिनजियांग को लेकर भी चिंता
खुले पत्र में संगठनों ने तिब्बतियों, उइगरों और चीन के अन्य समुदायों से जुड़े अधिकारों को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। उनका आरोप है कि सरकारी नीतियां इन समुदायों की संस्कृति, पहचान और भाषाई अधिकारों को प्रभावित कर रही हैं। संगठनों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष सुनवाई से जुड़े अधिकारों को लेकर भी चिंता जताई है। हालांकि, ये आरोप संबंधित advocacy organizations के हैं और चीन सरकार की ओर से इन सभी दावों को स्वीकार किए जाने की पुष्टि इस पत्र में नहीं है।

हांगकांग और प्रेस की आजादी का मुद्दा
पत्र में हांगकांग की नागरिक स्वतंत्रताओं और स्वतंत्र मीडिया को लेकर भी चिंता जताई गई है। संगठनों ने 2020 के Hong Kong National Security Law में बदलाव या उसे समाप्त करने की दिशा में कदम उठाने की मांग की है।

2026 के नए कानून पर भी सवाल
संगठनों ने चीन के नए Law on Promoting Ethnic Unity and Progress का भी उल्लेख किया है। यह कानून 12 मार्च 2026 को पारित हुआ और 1 जुलाई 2026 से लागू हुआ। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह कानून अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों के विपरीत है और उन्होंने इसमें संशोधन या इसे वापस लेने की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र के कुछ विशेष मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भी इस कानून को लेकर चीन सरकार को अपनी टिप्पणियां भेजी थीं और इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप लागू करने पर चिंता जताई थी।

चीन पर 'ट्रांसनेशनल रिप्रेशन' के आरोप
संगठनों ने चीन पर विदेशों में रहने वाले आलोचकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर निशाना बनाने का भी आरोप लगाया है। पत्र के मुताबिक, कुछ हस्ताक्षरकर्ताओं ने अमेरिका में कथित उत्पीड़न, पीछा किए जाने या निगरानी का सामना करने की बात कही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चीन में रहने वाले कुछ कार्यकर्ताओं के परिवारों को उनके विदेश में किए जा रहे काम के कारण निशाना बनाया गया। संगठनों ने ऐसे मामलों की जांच और कार्रवाई के लिए अमेरिका तथा अन्य देशों के प्रयासों का स्वागत किया है।

दलाई लामा को लेकर भी मांग
खुले पत्र में संगठनों ने चीन से यह पुष्टि करने की मांग की है कि देश से बाहर रहने वाले लोग, जिनमें 14वें दलाई लामा भी शामिल हैं, अपने परिवार और समुदाय से मिलने के लिए सुरक्षित रूप से चीन की यात्रा कर सकें। इसके अलावा, संगठनों ने शी जिनपिंग से यह सार्वजनिक रूप से कहने की मांग की है कि उनकी अमेरिकी यात्रा के दौरान उनका प्रतिनिधिमंडल और अमेरिका में मौजूद उनके सहयोगी प्रदर्शन या विरोध करने वालों के खिलाफ कथित 'ट्रांसनेशनल रिप्रेशन' या सामूहिक दंड का सहारा नहीं लेंगे।

24 सितंबर को प्रस्तावित है शी का वॉशिंगटन दौरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच 24 सितंबर को वॉशिंगटन में मुलाकात प्रस्तावित है। रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और अन्य मुद्दों पर बातचीत के बीच शी का यह दौरा हो रहा है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि उनके द्वारा उठाए गए कदमों पर कार्रवाई नहीं हुई तो शी की यात्रा के दौरान चीन की मानवाधिकार नीतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी रह सकती है।