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दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ क्यों होती है भगवान गणेश की पूजा? जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यता

Toshi Shah · 8 नवम्बर 2026
Lord Ganesha worshipped alongside Goddess Lakshmi during Diwali

दिवाली हिंदू धर्म का एक खास और बड़ा त्योहार है। हर साल कार्तिक महीने की अमावस्या को दीपावली मनाई जाती है। इस दिन लोग अपने घरों को दीपों, रंगोली और रोशनी से सजाते हैं, साथ ही घर में सुख-शांति और खुशहाली के लिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा करना इतना जरूरी क्यों माना जाता है? इसके पीछे कई धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं।

दिवाली और मां लक्ष्मी का क्या है संबंध?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं, उन्हें धन, सुख, सौभाग्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि दिवाली की रात मां लक्ष्मी धरती पर आती हैं और उन घरों में वास करती हैं, जहां साफ-सफाई होती है और दीप जलाकर उनका स्वागत किया जाता है।

यही वजह है कि दिवाली से पहले लोग अपने घरों की अच्छी तरह सफाई करते हैं और त्योहार की रात पूरे विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

दिवाली पर भगवान गणेश की क्यों होती है पूजा?

भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान और विवेक का देवता माना जाता है। उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है, यानी वे भक्तों के जीवन से परेशानियां और बाधाएं दूर करते हैं। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम की शुरुआत गणेश जी की पूजा से करने की परंपरा है।

दिवाली पर गणेश जी की पूजा करने के पीछे भी एक खास संदेश छिपा है। जीवन में सिर्फ पैसा होना ही काफी नहीं होता, बल्कि उस पैसे का सही इस्तेमाल करने के लिए समझदारी और अच्छी सोच भी जरूरी है। इसलिए मां लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा की जाती है, ताकि व्यक्ति को धन के साथ बुद्धि और विवेक भी मिले।

मां लक्ष्मी और गणेश जी की एक साथ पूजा करने की वजह

दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा का मतलब है कि इंसान के जीवन में धन और बुद्धि दोनों का संतुलन बना रहे। मां लक्ष्मी समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक हैं, वहीं गणेश जी ज्ञान और सही फैसले लेने की शक्ति का प्रतीक माने जाते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि अगर किसी व्यक्ति के पास धन तो हो, लेकिन उसे सही तरीके से इस्तेमाल करने की समझ न हो, तो वह धन भी परेशानी की वजह बन सकता है। इसी कारण दिवाली पर दोनों देवी-देवताओं की पूजा करके भक्त सुख, समृद्धि और अच्छी बुद्धि की कामना करते हैं।

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क्या है मां लक्ष्मी और गणेश जी से जुड़ी पौराणिक कथा?

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार मां लक्ष्मी को अपने धन और ऐश्वर्य पर घमंड हो गया था। तब भगवान विष्णु ने उन्हें समझाया कि धन और वैभव होने के बावजूद मातृत्व के बिना जीवन अधूरा रहता है।

भगवान विष्णु की बात सुनकर मां लक्ष्मी दुखी हो गईं। उनकी उदासी देखकर माता पार्वती ने अपने पुत्र भगवान गणेश को उनकी गोद में बैठा दिया। गणेश जी को गोद में पाकर मां लक्ष्मी बहुत खुश हुईं और उन्होंने उन्हें अपना पुत्र मान लिया।

कहा जाता है कि इसके बाद मां लक्ष्मी ने गणेश जी को वरदान दिया कि जो भी भक्त उनकी पूजा करेगा, उसे गणेश जी की पूजा भी जरूर करनी होगी। तभी उसे दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होगा। इसी धार्मिक मान्यता के चलते दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की एक साथ पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।

(डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि TNP News नहीं करता है)