वाराणसी में गंगा पर 6 लेनडबल डेकर पुल से बदलेगी काशी की कनेक्टिविटी, वाराणसी-चंदौली को होगा फायदा
Varanasi Double Decker Bridge: काशी में गंगा नदी पर बन रहा नया रेल-सड़क डबल डेकर पुल आने वाले समय में शहर की कनेक्टिविटी बदल सकता है। करीब 2,642 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस पुल के निचले हिस्से में चार रेलवे ट्रैक और ऊपरी हिस्से में छह लेन की सड़क बनाई जा रही है। यह पुल 1887 में बने मालवीय ब्रिज का विकल्प बनेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 अक्टूबर को वाराणसी दौरे के दौरान इस परियोजना समेत कई विकास कार्यों का जायजा लेंगे।
प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। नमो घाट पर आयोजित 'विंग्स ऑफ गंगा' एयर शो के अंतिम दिन भारतीय वायु सेना के विमान और हेलीकॉप्टर हवाई करतब दिखाएंगे। इस दौरान राफेल, तेजस और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों के साथ सूर्य किरण और सारंग टीम के प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
एक ही पुल पर ट्रेन और सड़क, 2,642 करोड़ रुपये की परियोजना
गंगा पर बन रहा नया पुल वाराणसी में रेल और सड़क यातायात को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। इसके निचले डेक पर चार रेलवे लाइनें बिछाई जाएंगी, जबकि ऊपरी डेक पर छह लेन की सड़क होगी। इस व्यवस्था से एक ही पुल के जरिए रेल और सड़क, दोनों तरह के यातायात को सुविधा मिलेगी। प्रस्तावित पुल काशी रेलवे स्टेशन के पास मौजूदा मालवीय ब्रिज से करीब 50 मीटर की दूरी पर बनाया जा रहा है। इसकी लंबाई एक किलोमीटर से अधिक बताई गई है। निर्माण में ओपन वेब स्टील गर्डर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य बढ़ते यातायात के दबाव को संभालना और रेल परिचालन की क्षमता बढ़ाना है।
1887 में बना मालवीय ब्रिज अब क्यों पड़ रहा है छोटा?
गंगा नदी पर बना मौजूदा मालवीय ब्रिज डफरिन ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण वर्ष 1887 में हुआ था। करीब 139 साल पुराने इस पुल पर दो रेल लाइनें और दो लेन की सड़क है। वाराणसी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के बीच रेल यातायात काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में पुराने पुल की सीमित क्षमता के कारण परिचालन पर दबाव पड़ता है। नए पुल के तैयार होने से इस मार्ग पर रेल यातायात को अधिक जगह मिलने की उम्मीद है। इससे ट्रेनों की आवाजाही बेहतर करने और देरी कम करने में मदद मिल सकती है।
वाराणसी और चंदौली के बीच कनेक्टिविटी होगी बेहतर
नया पुल वाराणसी और चंदौली जिले के बीच संपर्क को मजबूत करेगा। सड़क यातायात के लिए भी इससे राहत मिलने की उम्मीद है। जीटी रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग से आने-जाने वाले वाहनों को शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों में प्रवेश किए बिना आगे निकलने का बेहतर विकल्प मिल सकता है। परियोजना से जुड़े अनुमानों के मुताबिक, नए रेल कॉरिडोर से डीजल की खपत और परिचालन खर्च में कमी आ सकती है। निर्माण कार्य के दौरान बड़ी संख्या में मानव-दिवस के रोजगार पैदा होने की भी उम्मीद है। बेहतर यातायात व्यवस्था का लाभ काशी विश्वनाथ मंदिर, नमो घाट और सारनाथ आने वाले श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों को भी मिल सकता है।
मिर्जामुराद में टेक्सटाइल यूनिट का उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी
वाराणसी दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र के मिर्जामुराद में अरविंद मिल्स की टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन भी करेंगे। यह उत्तर प्रदेश में कंपनी की पहली टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बताई गई है। इस फैक्ट्री से पूर्वांचल के कपड़ा उद्योग और हथकरघा क्षेत्र को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, रोजगार की वास्तविक संख्या और परियोजना के अन्य लाभों की जानकारी संबंधित आधिकारिक विवरण से स्पष्ट होगी।
काशी रेलवे स्टेशन और रोपवे परियोजना की भी समीक्षा
प्रधानमंत्री काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और शहरी रोपवे परियोजना की प्रगति का भी जायजा लेंगे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर में यातायात के विकल्प बढ़ाना और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देना है। इसके अलावा वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान परिसर में बने नेशनल सेंटर ऑफ एजिंग का लोकार्पण करेंगे। इस केंद्र में 200 बेड की क्षमता बताई गई है। इसका उद्देश्य बुजुर्गों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना और वृद्धावस्था से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर शोध को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और वित्त मंत्री सुरेश खन्ना समेत कई नेताओं के शामिल होने की संभावना है। दौरे को देखते हुए नमो घाट से मिर्जामुराद तक सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियां की गई हैं।SEO के लिए जरूरी जानकारी।