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US Tariff on India: रूस से दोस्ती या अमेरिका से टक्कर? 100% टैरिफ के बिल ने भारत की बढ़ाई चिंता

Rajeev Singh · 8 अगस्त 2026
US Tariff on India

US Tariff on India: अमेरिकी सीनेट ने रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था (War Machine) को आर्थिक रूप से पंगु बनाने के लिए एक अत्यंत कड़ा प्रतिबंध विधेयक पास कर दिया है। 86-11 के भारी बहुमत से पारित इस बिल के तहत रूस से ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले शीर्ष देशों विशेष रूप से भारत और चीन पर 100% तक सीमा शुल्क (टैरिफ) लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को देने का प्रावधान है। इस विधेयक को दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर के सम्मान में 'लिंडसे ओ. ग्राहम सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026' नाम दिया गया है।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान
शीर्ष तेल खरीदारों पर 100% टैरिफ: रूस से सबसे ज्यादा तेल और गैस खरीदने वाले 5 प्रमुख देशों (भारत, चीन, अज़रबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया) से अमेरिका आने वाले सामानों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। रूस से आने वाले कुल आयात पर 500% तक टैरिफ का प्रावधान है। इसके अलावा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, शीर्ष अधिकारियों, ओलिगार्ख्स, वित्तीय संस्थानों और अवैध 'शैडो फ्लीट' (Shadow Fleet) पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे। इसके तहत ईरान एनर्जी सेक्टर पर लगने वाले 1996 के प्रतिबंधों की अवधि को भी 2031 तक बढ़ा दिया गया है।

क्या भारत पर तुरंत लागू होगा 100% टैरिफ?
यह बिल अभी सीनेट से पास हुआ है। इसे अब निचले सदन यानी 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' में पेश किया जाएगा। गर्मियों की छुट्टियों के कारण सदन के दोबारा पुनर्गठन (31 अगस्त के बाद) के बाद ही इस पर वोटिंग संभव होगी। यह कानून स्वचालित रूप से टैरिफ नहीं लगाता। यह अमेरिकी राष्ट्रपति को यह विवेकाधिकार देता है कि वे राष्ट्रीय हितों या रणनीतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए छूट दे सकते हैं या टैरिफ लागू कर सकते हैं।

द्विपक्षीय संबंधों पर असर
भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और इंडो-पैसिफिक पार्टनर है। हालांकि भारत पर पहले से कुछ मामलों में अतिरिक्त टैरिफ का दबाव रहा है, लेकिन वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत का रूसी तेल खरीदना महत्वपूर्ण माना जाता है।

वैश्विक बाजार और भारत का रुख
अमेरिकी सीनेटर डार्लीन ग्राहम ने कहा कि अगर भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार अचानक रूसी तेल लेना बंद कर देते हैं, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अत्यधिक बढ़ सकती हैं, जिससे अमेरिका सहित पूरी दुनिया में महंगाई का नया संकट आ जाएगा। भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि उसकी ऊर्जा खरीदारी अपने राष्ट्रीय हित और देश की ऊर्जा सुरक्षा से तय होती है। यह विधेयक रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले देशों के सामने एक स्पष्ट विकल्प रखता है,अमेरिका के साथ व्यापार करें या रूस से सस्ता तेल खरीदें।

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Written by Shailesh Yadav