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US-Iran War: ईरान की शर्तों ने क्यों बढ़ाई डोनाल्ड ट्रंप की बेचैनी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर गहराया संकट, जानें सबकुछ

Anurag Kumar Tripathi · 18 अक्टूबर 2026
US-Iran War

US-Iran War: दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में शामिल अमेरिका के आगे ईरान बिल्कुल भी झुकने के लिए तैयार नहीं है। ईरान लगातार ट्रंप के आंखों में आंखे डालकर उससे बराबरी कर रहा है। बीते कुछ दिनों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों के बीच जारी जंग की चिंगारी भारत समेत अन्य देशों पर भी पड़ सकती है। इन सबके बीच ईरान के विदेश मंत्री ने ट्रंप के सामने एक खतरनाक शर्त रख दी है। आईए आपको बताते है इससे जुड़ी जानकारी।

ईरान की शर्तों ने बढ़ाई ट्रंप की बेचैनी

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वाशिंगटन के साथ बातचीत को लेकर तेहरान का रुख स्पष्ट किया है। मीडिया से बात करते हुए विदेश मंत्री ने कहा, हमारी शर्तें बिल्कुल साफ हैं और इन्हें सात-दिवसीय योजना के रूप में अमेरिका के सामने रखा गया था। उन्होंने इस पर कुछ टिप्पणियां दी हैं, जिन पर हम विचार कर रहे हैं, लेकिन हमारी नजर में यह योजना अभी भी कायम है।

अगर अमेरिकी पक्ष में ईमानदारी हो, जो कि फिलहाल नहीं है, तो आगे बढ़ने का रास्ता यही है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से खोल दिया जाए। अगर हमारी शर्तें मान ली जाती हैं, तो छठे दिन यह जलडमरूमध्य खुल जाएगा और सातवें दिन बातचीत शुरू हो जाएगी।

भारत ने साफ किया अपना रूख

बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लगातार जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है। इसी को लेकर भारत ने चिंता जाहिर की है। जहाजों पर हुए हमले में कई भारतीय घायल हुए थे, जो जहाज पर मौजूद थे। अमेरिका और ईरान, दोनों ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण होने का दावा करते हैं, जबकि तेल के इस अहम रास्ते पर व्यावसायिक जहाजों पर हमले जारी हैं।

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने चेतावनी दी है कि यह जलडमरूमध्य "बंद" है, वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि यह खुला है और ज्यादातर जहाज सुरक्षित रूप से यहां से गुजरते हैं।

शुक्रवार से अब तक पांच टैंकरों पर हमले हुए हैं, और UK मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, इनमें से एक टैंकर पर एक छोटी नाव से रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड दागा गया था।

अब सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या अमेरिका ईरान की बात मानेगा या एक बार फिर दोनों देशों के बीच युद्ध हो सकता है।