UP Politics: PDA पर पंकज चौधरी का अखिलेश यादव पर निशाना, सपा के पोस्टर से गरमाई सियासत
UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी बयानबाजी तेज होने लगी है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उनके PDA फॉर्मूले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के नाम पर राजनीति करते हुए अपने परिवार के राजनीतिक हितों को आगे बढ़ा रही है। वहीं, सपा की ओर से ब्राह्मणों और केवट समुदाय को जोड़ने की कोशिश से जुड़ा एक पोस्टर भी चर्चा में है।
PDA के नाम पर परिवारवाद को छिपाने की कोशिश
ANI से बातचीत में पंकज चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी की राजनीति सामाजिक न्याय के बजाय एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रही है। उनके मुताबिक, पार्टी PDA के नारे के जरिए अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाना चाहती है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि सपा नेता अपनी पार्टी के नाम के बजाय PDA की बात ज्यादा करते हैं, क्योंकि 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर लोगों के मन में सवाल हैं। उन्होंने उस दौर को माफिया राज, रंगदारी, अराजकता और सांप्रदायिक तनाव से जोड़ते हुए सपा नेतृत्व पर हमला बोला। हालांकि, ये आरोप पंकज चौधरी के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। इन्हें उनके दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर BJP का सवाल
पंकज चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी समय-समय पर PDA की परिभाषा बदलती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों की बात करने के बजाय परिवारवाद और तुष्टीकरण की राजनीति करती है। गौरतलब है कि PDA का अर्थ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक है। अखिलेश यादव की राजनीति में यह सामाजिक समूहों को एक साथ लाने की रणनीति के रूप में प्रमुखता से सामने आया है। बीजेपी नेता ने इसी रणनीति पर सवाल उठाते हुए इसे चुनावी रीब्रांडिंग बताया।
युवाओं और कानून-व्यवस्था को लेकर क्या बोले पंकज चौधरी?
उत्तर प्रदेश के युवाओं में सरकार को लेकर असंतोष के सवाल पर पंकज चौधरी ने कहा कि आज 18 से 20 वर्ष के युवा 2017 से पहले की परिस्थितियों को प्रत्यक्ष रूप से नहीं जानते। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और विकास के क्षेत्र में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी युवाओं तक पहुंचकर सरकार के कामकाज और विकास योजनाओं की जानकारी दे रही है। चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पारदर्शी शासन, आधुनिक बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास को पार्टी की उपलब्धियों के रूप में पेश किया।
2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से BJP ने क्या सबक लिया?
2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीतकर राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में प्रदर्शन किया था। इस नतीजे का जिक्र करते हुए पंकज चौधरी ने कहा कि विपक्ष ने संविधान और एक लाख रुपये की गारंटी जैसे मुद्दों के जरिए मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा किया। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी ने चुनावी नतीजों की समीक्षा की है और राज्य की 1.66 लाख से अधिक बूथ इकाइयों पर संगठनात्मक स्तर पर सुधार किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में बूथ स्तर पर अपनी रणनीति मजबूत कर रही है।
सपा-कांग्रेस गठबंधन पर भी कसा तंज
पंकज चौधरी ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के संभावित गठबंधन पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दोनों दलों के पुराने गठबंधन का जिक्र करते हुए कांग्रेस की उत्तर प्रदेश में कमजोर चुनावी स्थिति पर निशाना साधा। बीजेपी नेता ने कहा कि आगामी चुनाव में मतदाता विकास, कानून-व्यवस्था और सरकार के कामकाज के आधार पर फैसला करेंगे। यह उनका राजनीतिक आकलन है; 2027 के चुनाव में मतदाताओं का रुख अभी भविष्य की बात है।
सपा मुख्यालय के बाहर पोस्टर से PDA की नई चर्चा
इस सियासी बयानबाजी के बीच लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी मुख्यालय के बाहर लगा एक पोस्टर भी चर्चा में आया है। पोस्टर में अखिलेश यादव को नाव पर सवार दिखाया गया है और ब्राह्मणों तथा केवट समुदाय को साथ लाने का संदेश दिया गया है।
ब्राह्मण दिखाएंगे राह, केवट लगाएंगे पार, मिलकर बनाएंगे PDA सरकार
इस संदेश को सपा की ओर से अपने पारंपरिक PDA आधार का विस्तार करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इसमें ब्राह्मण समुदाय के साथ केवट, निषाद और मल्लाह जैसे नदी किनारे रहने वाले समुदायों तक पहुंच बनाने का संकेत मिलता है। पोस्टर की प्रतीकात्मकता रामायण के उस प्रसंग से भी जुड़ती है, जिसमें केवट भगवान राम और लक्ष्मण को गंगा पार कराते हैं। राजनीतिक संदेश के तौर पर नाव की यह तस्वीर अलग-अलग सामाजिक समूहों को एक साथ लाने की कोशिश को दर्शाती है।
2027 से पहले सामाजिक समीकरणों पर बढ़ेगा जोर
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच PDA, परिवारवाद, कानून-व्यवस्था और विकास जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है। एक ओर बीजेपी सपा के शासनकाल और उसके सामाजिक समीकरणों पर सवाल उठा रही है, तो दूसरी ओर सपा के पोस्टर में नए सामाजिक समूहों को जोड़ने का संदेश सामने आया है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों दल अपने-अपने सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं और इन मुद्दों को जनता के बीच किस तरह पेश करते हैं।
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