टीएनपी न्यूज़
होम / उत्तर प्रदेश चुनाव
उत्तर प्रदेश चुनाव

मल्हनी में जनता ने बढ़ाई अखिलेश यादव की टेंशन! BJP ले रही चुटकी, क्या फिर चलेगा लकी यादव का जादू?

Shailesh Yadav · 30 अक्टूबर 2026
मल्हनी में जनता ने बढ़ाई अखिलेश यादव की टेंशन!

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही सियासी पारा चढ़ने लगा है। जौनपुर की मल्हनी विधानसभा सीट पर भी चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कहीं समाजवादी पार्टी के कामकाज की तारीफ हो रही है, तो कहीं बीजेपी और कांग्रेस को लेकर जनता के तीखे सवाल सामने आ रहे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि जनता के बीच हो रही चर्चाओं ने सपा की राह को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में क्या मल्हनी में अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं? क्या बीजेपी इस बार सपा के मजबूत किले में सेंध लगा पाएगी?

इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने के लिए TNP News की खास पेशकश '27 की सत्ता' की टीम जौनपुर की मल्हनी विधानसभा के ग्राउंड पर पहुंची। यहां लोगों से बातचीत के दौरान चुनावी माहौल, विकास कार्यों और राजनीतिक दलों के दावों को लेकर अलग-अलग राय सामने आई। किसी ने समाजवादी पार्टी के कामकाज को बेहतर बताया, तो किसी ने बीजेपी की राजनीति पर सवाल उठाए। वहीं कांग्रेस की ओर से भी बीजेपी पर धर्म और जाति के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया गया।

मल्हनी में किसके पक्ष में बह रही हवा?
मल्हनी की गलियों और चौपालों में 2027 के चुनाव को लेकर चर्चाएं अभी से शुरू हो गई हैं। जनता के बीच समाजवादी पार्टी, बीजेपी और कांग्रेस को लेकर अलग-अलग विचार सुनने को मिले। सपा समर्थकों का दावा है कि पार्टी एक बार फिर सत्ता में वापसी करेगी। वहीं कुछ लोगों की राय में चुनाव केवल पुराने राजनीतिक समीकरणों से नहीं, बल्कि विकास और जनता के मुद्दों से तय होगा। ग्राउंड रिपोर्ट में सबसे बड़ा सवाल यही उभरकर आया कि क्या समाजवादी पार्टी अपने पुराने जनाधार को बरकरार रख पाएगी? या फिर बीजेपी इस बार कोई नया सियासी समीकरण तैयार कर सपा को चुनौती देगी?

रारी से मल्हनी बनने तक का सफर
मल्हनी विधानसभा का पुराना नाम रारी था। वर्ष 1951 में यह क्षेत्र जौनपुर दक्षिण विधानसभा के नाम से भी जाना जाता था। वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद रारी विधानसभा क्षेत्र की भौगोलिक सीमाओं में बदलाव हुआ। नए परिसीमन और विधानसभा क्षेत्र के पुनर्गठन के बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में यह सीट मल्हनी के नाम से अस्तित्व में आई। यह विधानसभा सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी की सीट है। यहां करीब 3.79 लाख से अधिक मतदाता होने की बात कही जाती है। जौनपुर की राजनीति में इस सीट का विशेष महत्व रहा है।

धनंजय सिंह के प्रभाव से बदली सियासत
रारी विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2002 और 2007 के चुनावों में बाहुबली नेता धनंजय सिंह ने अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। उन्होंने 2002 में निर्दलीय प्रत्याशी और 2007 में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के टिकट पर जीत दर्ज की। धनंजय सिंह की लगातार दो जीत ने इस क्षेत्र को प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना दिया। बाद के वर्षों में उनके सांसद बनने के बाद विधानसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति बनी और यहां राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिला।

पारसनाथ यादव ने मजबूत की सपा की पकड़
मल्हनी विधानसभा के नए स्वरूप में वर्ष 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता पारसनाथ यादव ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने अपनी जीत बरकरार रखी। पारसनाथ यादव ने इस क्षेत्र में समाजवादी पार्टी का मजबूत जनाधार तैयार किया। उनके राजनीतिक प्रभाव का असर आगे भी दिखाई दिया।

पिता की राजनीतिक विरासत संभाल रहे लकी यादव
वर्ष 2020 में पारसनाथ यादव के निधन के बाद मल्हनी विधानसभा सीट खाली हो गई। इसके बाद हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने उनके पुत्र लकी यादव को उम्मीदवार बनाया। लकी यादव ने चुनाव जीतकर अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। इसके बाद वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी लकी यादव ने जीत हासिल की। उन्होंने जेडीयू प्रत्याशी धनंजय सिंह को 17,527 वोटों के अंतर से हराया। इस जीत के साथ लकी यादव ने मल्हनी में समाजवादी पार्टी की मजबूत पकड़ को एक बार फिर साबित किया।

मल्हनी में लकी यादव का कितना मजबूत है किला?
मल्हनी विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी का मजबूत राजनीतिक आधार रहा है। वर्तमान विधायक लकी यादव ने 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। इससे पहले उनके पिता और सपा के वरिष्ठ नेता पारसनाथ यादव भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। हालांकि, मल्हनी की राजनीति को समझना इतना आसान नहीं है। इस सीट पर कभी धनंजय सिंह और उनके परिवार का भी खासा प्रभाव रहा है। ऐसे में 2027 के चुनाव में स्थानीय नेतृत्व, जातीय समीकरण और जनता के बीच मौजूद नाराजगी या संतुष्टि अहम भूमिका निभा सकती है।

क्यों खास है मल्हनी विधानसभा का सियासी गणित?
मल्हनी में यादव, मुस्लिम, अनुसूचित जाति, ठाकुर, ब्राह्मण और अन्य पिछड़े वर्गों के मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। यादव मतदाताओं की बड़ी संख्या को सपा का मजबूत आधार माना जाता है। हालांकि, गैर-यादव ओबीसी, दलित और सवर्ण मतदाताओं का रुख भी किसी उम्मीदवार की जीत-हार में महत्वपूर्ण हो सकता है। यही वजह है कि बीजेपी समेत दूसरे राजनीतिक दलों की नजर भी इस सीट पर बनी हुई है। यहां केवल जातीय समीकरण ही नहीं, बल्कि विकास, स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवार की लोकप्रियता भी चुनावी तस्वीर बदल सकते हैं।

2027 में किसकी होगी जीत, जनता ने क्या दिया संकेत?
मल्हनी की ग्राउंड रिपोर्ट से साफ है कि चुनाव को लेकर जनता के बीच चर्चा शुरू हो चुकी है। सपा समर्थक जहां दोबारा जीत का दावा कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों के लिए भी संभावनाओं के दरवाजे खुले दिखाई दे रहे हैं। लेकिन अभी चुनाव में वक्त है और जनता का अंतिम फैसला मतदान के दिन ही सामने आएगा। क्या अखिलेश यादव मल्हनी में अपना सियासी दबदबा कायम रख पाएंगे? क्या बीजेपी इस सीट पर सपा को कड़ी चुनौती देगी? या फिर कोई नया चेहरा और नया समीकरण पूरा खेल बदल देगा? 

और पढ़ें: UP Politics: 5 MLC सीटों पर जीत से गदगद अखिलेश यादव, बोले- 2027 में BJP की होने वाली है बड़ी हार!