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 यूपी में SIR पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, 2.96 करोड़ वोटरों के नाम कटने और 85,854 फॉर्म-7 पर मांगा जवाब

Shivashakti Narayan Singh · 9 अक्टूबर 2026
यूपी में SIR पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

लखनऊ, 9 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने, नए मतदाताओं के विवरण सार्वजनिक नहीं होने और फॉर्म-7 के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है।

कांग्रेस का कहना है कि उत्तर प्रदेश में SIR के दौरान 2.96 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने, लगभग 16 लाख नए मतदाताओं को जोड़ने और 85,854 फॉर्म-7 तैयार किए जाने से जुड़े मामलों की जाच होनी चाहिए।

2.96 करोड़ मतदाताओं के नाम किन कारणों से हटाए गए?

कांग्रेस ने सवाल किया कि उत्तर प्रदेश में SIR के दौरान 2.96 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने के पीछे क्या कारण थे। निर्वाचन आयोग को इसका स्पष्ट और श्रेणीवार विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। पार्टी ने पूछा कि कितने नाम मृत मतदाताओं के कारण हटाए गए और कितने लोग स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए थे। इसके अलावा दोहरी प्रविष्टियों या अन्य कारणों से हटाए गए नामों की जानकारी भी मांगी गई है।

कारण बताने की मांग 

कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि कितने पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने की शिकायतें आईं और क्या सभी प्रभावित मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।पार्टी ने आयोग से हटाए गए नामों की कारणवार और बूथवार सूची जारी करने की मांग की, ताकि जनता इन बदलावों की जाँच कर सके।

16 लाख नए मतदाताओं के विवरण सार्वजनिक नहीं होने पर सवाल

कांग्रेस ने SIR के दौरान फॉर्म-6 के जरिए लगभग 16 लाख नए मतदाताओं को जोड़े जाने से जुड़े विवरण सार्वजनिक किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी ने पूछा कि इन मतदाताओं के आवेदन कब प्राप्त हुए और किन तारीखों पर उनके नाम मतदाता सूची में जोड़े गए। क्या निर्धारित सार्वजनिक सूचनाएं उपलब्ध कराई गईं और यदि विवरण सार्वजनिक नहीं हुए, तो इसका कानूनी आधार क्या है?

85,854 फॉर्म-7 की प्रक्रिया पर कांग्रेस ने मांगा जवाब

कांग्रेस ने 85,854 फॉर्म-7 तैयार किए जाने की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। फॉर्म-7 के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज करने और निर्धारित आधारों पर नाम हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। पार्टी ने पूछा कि ये फॉर्म किसके निर्देश पर और किन आधारों पर तैयार किए गए। क्या प्रत्येक फॉर्म के पीछे विधिवत दर्ज आपत्ति थी और यदि फॉर्म पहले से भरे हुए थे, तो उनमें जानकारी किसने दर्ज की?

सभी को नोटिस का अधिकार 

कांग्रेस ने यह भी जानना चाहा कि संबंधित मतदाताओं को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया या नहीं। इन फॉर्मों के आधार पर वास्तव में कितने नाम हटाए गए और क्या निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) ने प्रत्येक मामले पर स्वतंत्र रूप से विचार किया? पार्टी ने फॉर्म-7 की तैयारी, आपत्तियों की सुनवाई और निर्णय लेने की प्रक्रिया की जांच करने की मांग की है।

SIR की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी थी या नहीं?

कांग्रेस का कहना है कि 2.96 करोड़ नाम हटाए जाने, लगभग 16 लाख नए मतदाताओं को जोड़ने और 85,854 फॉर्म-7 से जुड़े मामलों की अलग-अलग जाँच होनी चाहिए। पार्टी ने स्पष्ट किया कि इन आंकड़ों के आधार पर किसी साजिश का निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित रिकॉर्ड और आधिकारिक तथ्यों की जाँच जरूरी है। हालांकि, इन मामलों में उठे सवालों का जवाब देना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है। कांग्रेस ने मांग की कि नाम हटाने, नए नाम जोड़ने और फॉर्म-7 के इस्तेमाल से जुड़े आवश्यक रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो निष्पक्ष जाँच कर जिम्मेदारी तय की जाए।

निर्वाचन आयोग से मतदाता सूची में बदलावों का पूरा हिसाब देने की मांग

कांग्रेस ने कहा कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता लोकतंत्र की बुनियाद है। उत्तर प्रदेश के नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनके नाम मतदाता सूची में सुरक्षित हैं या नहीं और सूची में बदलाव किन नियमों के तहत किए गए हैं। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से नाम हटाने के कारणवार आंकड़े, नए मतदाताओं से संबंधित निर्धारित सार्वजनिक विवरण और फॉर्म-7 के इस्तेमाल का रिकॉर्ड सामने रखने की मांग की है।कांग्रेस के मुताबिक, यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जाँच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

यह एक गंभीर विषय है 

पार्टी ने कहा कि मताधिकार प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटना गंभीर विषय है। यूपी में SIR को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब पारदर्शिता, आधिकारिक रिकॉर्ड और निष्पक्ष जाँच से ही मिल सकता है।

Reported By-M. Atharuddin Munne Bharti