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UP Election 2027: मोदीनगर का सियासी समीकरण क्या कहता है? 2027 में किसकी होगी सत्ता?

Ajit Kumar Singh · 7 नवम्बर 2026
modinagar political equation
UP Vidhansabha Election 2027: उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर गाजियाबाद जिले की मोदीनगर विधानसभा सीट (सीट संख्या 57) पर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा चुका है। बागपत लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यह सीट वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास है और यहाँ की मौजूदा विधायक डॉ. मंजू शिवाच हैं। लेकिन, यहां चुनावी माहौल के बीच सबसे बड़ा सवाल है कि क्या मौजूदा विधायक के विकास कार्यों से जनता संतुष्ट है या फिर इस बार जनता बदलाव के मूड में है?

मौजूदा राजनीतिक स्थिति और 2022 का परिणाम

-विधायक: डॉ. मंजू शिवाच (BJP)
-पिछला नतीजा: 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की डॉ. मंजू शिवाच को 1,13,349 वोट (50.64%) मिले थे। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के सुदेश शर्मा को 34,619 वोटों के -अंतर से हराया था, जिन्हें 78,730 वोट मिले थे। तीसरे स्थान पर बसपा की डॉ. पूनम गर्ग (26,729 वोट) रही।

मतदाता संख्या और जातीय समीकरण

-घटते मतदाता (एसआईआर रिपोर्ट): सितंबर 2026 में सामने आई एसआईआर (SIR) रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, मोदीनगर विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या घटकर 3,10,281 रह गई है, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान यहाँ 3,37,499 वोटर थे। करीब 27,218 मतदाताओं की कमी आई है।
-जातीय समीकरण: बागपत लोकसभा से जुड़ी होने के कारण इस सीट पर जाट, गुर्जर, त्यागी, ब्राह्मण, मुस्लिम और अनुसूचित जाति (SC) के मतदाताओं की अच्छी-खासी संख्या है। बीजेपी और आरएलडी का पारंपरिक वोट बैंक एक साथ आने से यहाँ का जातीय समीकरण काफी बदल गया है।

विकास बनाम बुनियादी समस्याओं पर जनता के सवाल

मोदीनगर विधानसभा सीट गाजियाबाद जिले की महत्वपूर्ण सीटों में शामिल है। इस सीट से वर्तमान में बीजेपी की डॉ. मंजू शिवाच विधायक हैं। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। मोदीनगर में विकास के दावों के बीच कई स्थानीय मुद्दे चर्चा में हैं। शहर में रेलवे ओवरब्रिज, कॉलेज और बस स्टैंड के सौंदर्यीकरण जैसे कार्य हुए हैं। वहीं ग्रामीण इलाकों में जलभराव, खराब सड़कें, बिजली,  पानी, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास जैसे मुद्दे की समस्याओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब सवाल यह है कि विकास की रफ्तार शहर तक सीमित है या गांवों तक भी पहुंची है? क्या युवाओं को रोजगार मिल रहा है? क्या किसानों की समस्याओं का समाधान हुआ है? स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाओं से लोग कितने संतुष्ट हैं?

2027 के लिए गठबंधन और टिकट का नया समीकरण

-BJP-RLD गठबंधन का प्रभाव: साल 2022 में बीजेपी और आरएलडी एक-दूसरे के खिलाफ लड़े थे। लेकिन बदले हुए सियासी समीकरणों में अब राष्ट्रीय लोकदल (RLD) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बन चुकी है। -सीट शेयरिंग को लेकर कशमकश: मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 2027 के चुनाव में इस सीट की दावेदारी को लेकर गठबंधन के भीतर मंथन जारी है। जहाँ आरएलडी के वरिष्ठ नेता पंडित सुदेश शर्मा इस सीट पर फिर से तैयारी कर रहे हैं, वहीं भाजपा अपनी मौजूदा महिला विधायक डॉ. मंजू सिवाच को दोबारा मैदान में उतारने पर जोर दे सकती है।  RLD के साथ आने से इस क्षेत्र में NDA का पलड़ा फिलहाल मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है।

विपक्षी गठबंधन (I.N.D.I.A) का NDA को चुनौती

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का विपक्षी गठबंधन (INDIA) इस क्षेत्र में सत्ता विरोधी लहर को भुनाने की कोशिश में है। विपक्ष द्वारा स्थानीय स्तर पर मूलभूत सुविधाओं जैसे सड़क, पानी, बिजली, युवाओं के लिए रोजगार और किसानों की समस्याओं को मुख्य मुद्दा बनाया जा रहा है। हालांकि, आरएलडी और बीजेपी के संयुक्त प्रभाव तथा बहुजन समाज पार्टी (BSP) के अकेले चुनाव लड़ने के रुख के कारण विपक्षी दलों के लिए गैर-भाजपा वोटों को एकजुट करना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। ये भी पढ़ें-अखिलेश यादव का BJP पर हमला, बिस्मिल्लाह खान के घर को गिराने का लगाया आरोप