यूपी में 10 एक्सप्रेसवे से 7 शहरों में मेट्रो तक, CM योगी ने गिनाईं विकास की उपलब्धियां- किया ट्वीट
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में बीते वर्षों में सड़क, रेल और शहरी परिवहन के क्षेत्र में हुए बदलावों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के विकास की तस्वीर पेश की है। उन्होंने 10 एक्सप्रेसवे और 7 शहरों में मेट्रो जैसी सुविधाओं का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से कनेक्टिविटी बेहतर हुई है और प्रदेश में निवेश, कारोबार तथा रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिला है।
10 एक्सप्रेसवे से मजबूत हुई कनेक्टिविटी
उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे का विस्तार विकास के प्रमुख आधारों में गिना जा रहा है। बेहतर सड़क संपर्क से बड़े शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और आसपास के जिलों के बीच आवागमन आसान बनाने में मदद मिली है। इससे माल ढुलाई और व्यापार को भी गति मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाएं सड़क नेटवर्क के विस्तार में महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, अलग-अलग एक्सप्रेसवे की निर्माण स्थिति और चालू होने की तारीख के आधार पर ही कुल संख्या का आकलन किया जाना चाहिए।
X पर किया ट्वीट
वही यह बात उन्होंने X पर ट्वीट कर बताया, उन्होंने कहा कि "भाजपा की डबल इंजन सरकार बनने से पहले देश की सबसे बड़ी आबादी वाले प्रदेश में मात्र डेढ़ एक्सप्रेस-वे थे। आज प्रदेश में 10 एक्सप्रेस-वे संचालित हैं। साथ ही तब हवाई सेवाएं चुनिंदा शहरों तक सिमटी थीं, लेकिन आज 12 घरेलू और 05 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों से प्रदेश की उड़ान नई ऊंचाइयों पर है। तब प्रदेश के एक भी शहर में मेट्रो नहीं चलती थी। वहीं, आज 07 शहरों में मेट्रो जनजीवन को नई गति दे रही है।
सड़क, रेल और हवाई संपर्क केवल दूरियां नहीं घटाते, ये सुविधा, समय की बचत और समृद्धि की नई संभावनाएं लेकर आते हैं। लेकिन वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में विकास की इन जीवन रेखाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के यशस्वी मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार ने स्पीड, स्केल और कनेक्टिविटी के मंत्र से इस तस्वीर को बदला है। भाजपा की डबल इंजन सरकार बनने से पहले देश की सबसे बड़ी आबादी वाले प्रदेश में मात्र डेढ़ एक्सप्रेस-वे थे। आज प्रदेश में 10 एक्सप्रेस-वे संचालित हैं। तब हवाई सेवाएं चुनिंदा शहरों तक सिमटी थीं, लेकिन आज 12 घरेलू और 05 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों से प्रदेश की उड़ान नई ऊंचाइयों पर है। तब प्रदेश के एक भी शहर में मेट्रो नहीं चलती थी। वहीं, आज 07 शहरों में मेट्रो जनजीवन को नई गति दे रही है। इस परिवर्तन से किसान की उपज को बड़ा बाजार और उद्यमिता को नए अवसर मिल रहे हैं। युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार तक पहुंच सुगम हो रही है। कामकाजी लोगों का समय बच रहा है। पर्यटन का विस्तार भी हो रहा है, जिससे स्थानीय परिवारों की आजीविका को नई शक्ति मिल रही है। विकास की यह गति आज गांव से कस्बे और कस्बे से शहर तक नागरिकों के जीवन को बदल रही है। हर क्षेत्र को अवसर, हर उद्यम को सामर्थ्य और हर परिवार के जीवन में बढ़ती खुशहाली 'नए भारत' के 'नए उत्तर प्रदेश' की नई पहचान है।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 29, 2026
7 शहरों में मेट्रो का जिक्र
शहरी परिवहन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश में मेट्रो सेवाओं का विस्तार हुआ है। लखनऊ, नोएडा-ग्रेटर नोएडा, कानपुर और आगरा जैसे शहरों में मेट्रो परियोजनाएं सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
मेट्रो से यात्रियों को तेज और सुविधाजनक सफर का विकल्प मिलता है। साथ ही, सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने और शहरी आवागमन को अधिक व्यवस्थित बनाने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, सात शहरों में मेट्रो की उपलब्धता के दावे को शहरवार आधिकारिक स्थिति के साथ स्पष्ट करना जरूरी है।
निवेश और रोजगार पर सरकार का जोर
योगी सरकार प्रदेश को निवेश के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर देती रही है। बेहतर एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और शहरी परिवहन नेटवर्क को निवेश आकर्षित करने के महत्वपूर्ण साधन के तौर पर पेश किया जाता है।
सरकार के मुताबिक, बुनियादी ढांचे में सुधार से उद्योगों को बेहतर परिवहन सुविधाएं मिलती हैं और नए कारोबारी अवसर पैदा होते हैं। इन परियोजनाओं का वास्तविक आर्थिक और रोजगार संबंधी प्रभाव निवेश, उद्योगों की स्थापना तथा रोजगार के आंकड़ों से आंका जा सकता है।
विकास के दावों पर रहेगी नजर
उत्तर प्रदेश में सड़क और शहरी परिवहन नेटवर्क का विस्तार राज्य की विकास रणनीति का अहम हिस्सा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन उपलब्धियों के जरिए प्रदेश में हुए बदलावों को रेखांकित किया है। अब इन परियोजनाओं के साथ रोजगार, निवेश और आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं में हुए सुधार का आकलन भी महत्वपूर्ण रहेगा।
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