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UNHRC में गूंजी बलूचिस्तान की आवाज! मुनीर मेंगल ने उठाया जबरन गुमशुदगी का मुद्दा, पाकिस्तान से जवाबदेही की मांग

Shailesh Yadav · 24 सितम्बर 2026
UNHRC में गूंजी बलूचिस्तान की आवाज!

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र में बलूच वॉयस एसोसिएशन के अध्यक्ष मुनीर मेंगल ने पाकिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी, शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर प्रतिबंध और बलूच कार्यकर्ताओं की हिरासत का मुद्दा उठाया। उन्होंने परिषद से इन मामलों पर ठोस कार्रवाई और निगरानी की मांग की।

मेंगल ने कहा कि कथित तौर पर सुरक्षा बलों द्वारा ले जाए गए लोगों के परिवार लंबे समय से अपने परिजनों के बारे में जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान के कमीशन ऑफ इंक्वायरी ऑन एनफोर्स्ड डिसअपीयरेंसेज की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि यह प्रभावित परिवारों को पर्याप्त जवाबदेही और विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराने में विफल रहा है।

जबरन गुमशुदगी को अपराध बनाने की मांग
मुनीर मेंगल ने पाकिस्तान से घरेलू कानून के तहत जबरन गुमशुदगी को अपराध घोषित करने की मांग की। उन्होंने पाकिस्तान से इंटरनेशनल कन्वेंशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ ऑल पर्सन्स फ्रॉम एनफोर्स्ड डिसअपीयरेंस की पुष्टि करने और जबरन या अनैच्छिक गुमशुदगी पर संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह को बिना किसी बाधा के देश में पहुंच देने की अपील की।

शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर प्रतिबंध का मुद्दा
UNHRC में अपने संबोधन के दौरान मेंगल ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने के अधिकार पर कथित प्रतिबंधों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को सामूहिक गिरफ्तारियों का सामना करना पड़ता है और कुछ मामलों में आतंकवाद निरोधक तथा साइबर अपराध कानूनों के तहत मुकदमे दर्ज किए जाते हैं।

उन्होंने बलूच कार्यकर्ताओं का जिक्र करते हुए डॉ. महरंग बलूच और अन्य कार्यकर्ताओं की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की। मेंगल ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को भी वापस लिया जाना चाहिए।

मौत की सजा पर रोक की अपील
मुनीर मेंगल ने पाकिस्तान में मौत की सजा पर तत्काल रोक लगाने की भी अपील की। उन्होंने मानवाधिकार परिषद से पाकिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था बनाए रखने और समयबद्ध सुधारों की मांग करने को कहा।

उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को केवल बयान नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है।