दुनिया के सामने फिर चमकी भारत की ज्ञान परंपरा! UNESCO ने महाभारत समेत इन 3 ग्रंथों को दी खास पहचान
UNESCO: भारत की समृद्ध दस्तावेजी और बौद्धिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। इसके तीन सबसे प्रभावशाली ऐतिहासिक और साहित्यिक ग्रंथों—महाभारत, अर्थशास्त्र और राजतरंगिणी को यूनेस्को की 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कमिटी फॉर एशिया एंड द पैसिफिक' (MOWCAP) के क्षेत्रीय रजिस्टर में शामिल किया गया है।
इसकी जानकारी खुद केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दी है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल के माध्यम से यह जानकारी दी। यह फैसला इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर के 11वें सत्र में लिया गया।
केंद्रीय मंत्री दी अहम जानकारी
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, भारत के लिए अत्यंत गर्व का क्षण! UNESCO के 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर' में 'राजतरंगिणी', 'महाभारत' और 'अर्थशास्त्र' को शामिल किया जाना, भारत की असाधारण दस्तावेजी और सभ्यतागत विरासत को मिली एक महत्वपूर्ण मान्यता है।
A moment of immense pride for India! The inclusion of Rājataraṅgiṇī, Mahābhārata and Arthaśāstra in @UNESCO Memory of the World Asia-Pacific Regional Register is a landmark recognition of India’s extraordinary documentary and civilisational heritage. These timeless works embody our rich traditions of historical inquiry, philosophical thought and statecraft, whose wisdom continues to inspire humanity. Under the visionary leadership of Hon’ble PM Shri @narendramodi Ji, India’s civilisational legacy is receiving unprecedented global recognition and its rightful place on the world stage.
— Gajendra Singh Shekhawat (@gssjodhpur) November 5, 2026
ये कालजयी रचनाएं ऐतिहासिक अन्वेषण, दार्शनिक चिंतन और शासन-कला की हमारी समृद्ध परंपराओं को दर्शाती हैं, जिनकी प्रज्ञा आज भी मानवता को प्रेरित करती है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत की सभ्यतागत विरासत को अभूतपूर्व वैश्विक मान्यता मिल रही है और विश्व मंच पर उसे उसका उचित स्थान प्राप्त हो रहा है।
भारत की छह कृतियों को मिली क्षेत्रीय पहचान
महाभारत, अर्थशास्त्र और राजतरंगिणी के शामिल होने के बाद यूनेस्को के एशिया-पैसिफिक क्षेत्रीय रजिस्टर में भारत की कुल छह कृतियां दर्ज हो गई हैं। इससे पहले 2024 में रामचरितमानस की चित्रित पांडुलिपियों, 15वीं शताब्दी की पंचतंत्र पांडुलिपि और सहृदयालोक-लोचन को इस सूची में जगह मिली थी।
इन तीन नई पांडुलिपियों के नामांकन से जुड़े दस्तावेज तैयार करने में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह उपलब्धि भारत की प्राचीन साहित्यिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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