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8 घंटे सोने के बाद भी थकान? इन वजहों को न करें नजरअंदाज

Geeta Sharma · 16 सितम्बर 2026
8 घंटे सोने के बाद भी थकान? इन वजहों को न करें नजरअंदाज ( AI Photo )

कई लोग रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लेने के बावजूद सुबह उठकर थका हुआ महसूस करते हैं। आमतौर पर इसका कारण तनाव, ज्यादा काम या खराब लाइफस्टाइल को माना जाता है। लेकिन कुछ लोगों में नींद से जुड़ी परेशानी का संबंध मुंह और जबड़े की बनावट से भी हो सकता है। खासतौर पर छोटा या पीछे की ओर स्थित निचला जबड़ा सोते समय सांस के रास्ते को प्रभावित कर सकता है।

जबड़े की बनावट और नींद का क्या संबंध है?

सोते समय शरीर की मांसपेशियां सामान्य रूप से रिलैक्स हो जाती हैं। इस दौरान जीभ और गले के आसपास के नरम टिश्यू पीछे की ओर खिसक सकते हैं। अगर निचला जबड़ा छोटा या पीछे की ओर है, तो मुंह के अंदर जीभ के लिए उपलब्ध जगह कम हो सकती है। इससे जीभ और आसपास के टिश्यू सांस की नली को संकरा कर सकते हैं।

कुछ लोगों में यह स्थिति ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) से जुड़ी हो सकती है। इसमें नींद के दौरान सांस बार-बार रुकने या कम होने लगती है। इसके अलावा ज्यादा वजन, बढ़ती उम्र, शराब का सेवन और कुछ अन्य लाइफस्टाइल फैक्टर भी स्लीप एपनिया के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

पूरी नींद के बाद भी क्यों रहती है थकान?

स्लीप एपनिया में हर व्यक्ति को स्पष्ट रूप से सांस रुकने का एहसास नहीं होता। कई बार इसका सबसे प्रमुख संकेत सुबह उठने के बाद भी थकान या दिनभर सुस्ती रहना होता है।

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इसके साथ तेज खर्राटे, सुबह सिरदर्द, दिन में अत्यधिक नींद आना, चिड़चिड़ापन और ध्यान लगाने में परेशानी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। रात में बार-बार सांस लेने में रुकावट आने से नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है और शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। इसलिए व्यक्ति 7-8 घंटे बिस्तर पर रहने के बाद भी फ्रेश महसूस नहीं करता।

जांच के बाद ही तय होता है इलाज

अगर लगातार खर्राटे, दिनभर थकान, सुबह सिरदर्द या सोते समय सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है। जांच के दौरान जबड़े और चेहरे की बनावट, दांतों की स्थिति, जीभ की जगह और सांस के रास्ते से जुड़े अन्य पहलुओं का आकलन किया जा सकता है।

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जरूरत पड़ने पर स्लीप स्टडी भी की जाती है, जिससे पता लगाया जा सके कि नींद के दौरान सांस कितनी बार बाधित हो रही है और समस्या कितनी गंभीर है।

हर व्यक्ति का इलाज अलग हो सकता है

स्लीप एपनिया का इलाज व्यक्ति की स्थिति और समस्या की गंभीरता के आधार पर तय किया जाता है। कुछ लोगों को वजन कम करने, सोने की स्थिति बदलने या अन्य लाइफस्टाइल बदलाव की सलाह दी जा सकती है। कई मामलों में CPAP मशीन या विशेष ओरल उपकरण भी इस्तेमाल किए जाते हैं।