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‘तिब्बत से चीन बाहर जाए’: शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान वॉशिंगटन में तिब्बती-उइगर समुदाय का प्रदर्शन

Pradeep Singh · 25 सितम्बर 2026
तिब्बत के प्रदर्शनकारी

वॉशिंगटन डीसी: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के बीच तिब्बती, उइगर, हांगकांग, दक्षिणी मंगोलियाई और चीनी लोकतंत्र समर्थक समुदायों से जुड़े लोगों ने वॉशिंगटन डीसी में चीन के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने तिब्बत और शिनजियांग में मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए अमेरिकी प्रशासन से इन मामलों को चीन के साथ बातचीत में शामिल करने की अपील की।

प्रदर्शन के दौरान तिब्बती प्रदर्शनकारियों ने “We want China out of Tibet” जैसे नारे लगाए। यह प्रदर्शन शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान हुआ।

चीनी दूतावास से अमेरिकी कैपिटल तक मार्च

आयोजकों के अनुसार, दिनभर चले विरोध प्रदर्शन में चीनी दूतावास के बाहर प्रदर्शन, अमेरिकी कैपिटल की ओर मार्च और विभिन्न प्रवासी एवं मानवाधिकार संगठनों की भागीदारी वाली रैली शामिल थी।

इस प्रदर्शन में तिब्बती और उइगर समुदाय के अलावा हांगकांग, दक्षिणी मंगोलिया तथा चीनी लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। तिब्बती संगठनों के अनुसार, उत्तरी अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों से 2,000 से अधिक तिब्बतियों के प्रदर्शन में शामिल होने की उम्मीद थी।

उइगर मानवाधिकार कार्यकर्ता ने चीन की नीतियों पर लगाए आरोप

उइगर ह्यूमन राइट्स प्रोजेक्ट (UHRP) के कार्यकारी निदेशक ओमर कनात ने प्रदर्शन के दौरान तिब्बती और उइगर समुदायों की चिंताओं के बीच समानता का दावा किया।

कनात ने आरोप लगाया कि चीन की सरकार ने तिब्बत में धार्मिक गतिविधियों, तिब्बती भाषा और सांस्कृतिक जीवन पर गंभीर प्रतिबंध लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उइगर समुदाय भी धर्म, भाषा और संस्कृति से जुड़े समान प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।

उन्होंने उइगरों के संबंध में मनमानी हिरासत, जबरन मजदूरी, निगरानी, परिवारों से अलगाव और धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध जैसे आरोप भी लगाए।

कनात ने यह भी कहा कि चीन में कथित दमन का असर विदेशों में रहने वाले प्रवासी समुदायों तक भी पहुंचता है। उनके अनुसार, कुछ प्रवासी कार्यकर्ताओं को अपने परिवारों की सुरक्षा और खुलकर बोलने के बीच कठिन स्थिति का सामना करना पड़ता है।

तिब्बती संगठनों ने उठाया तिब्बत का मुद्दा

प्रदर्शन का नेतृत्व तिब्बती यूथ कांग्रेस और कैपिटल एरिया तिब्बती एसोसिएशन ने किया। इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत, स्टूडेंट्स फॉर ए फ्री तिब्बत और तिब्बती नेशनल कांग्रेस सहित कई अन्य संगठनों ने भी इसमें समर्थन दिया।

प्रदर्शनकारी संगठनों ने अमेरिकी प्रशासन से शी जिनपिंग के साथ बातचीत के दौरान तिब्बत और व्यापक मानवाधिकार मुद्दों को उठाने की मांग की। उन्होंने तिब्बत के लंबे समय से चले आ रहे विवाद के समाधान की दिशा में प्रयास करने की भी अपील की।

चीन ने आरोपों को किया खारिज

तिब्बती और उइगर अधिकार संगठनों के आरोपों पर बीजिंग का रुख अलग है। चीनी सरकार ऐसे आरोपों को खारिज करती है कि उसकी नीतियां इन क्षेत्रों में दमन के समान हैं। चीन का कहना है कि तिब्बत और शिनजियांग में उसकी नीतियों का उद्देश्य विकास, स्थिरता और उग्रवाद से मुकाबला करना है।

वॉशिंगटन में हुए ये प्रदर्शन ऐसे समय में हुए जब शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान चीन-अमेरिका संबंध, ताइवान, व्यापार, तकनीक और मानवाधिकार जैसे मुद्दे चर्चा में रहे।

तिब्बती और उइगर संगठनों का विरोध प्रदर्शन इस बात को रेखांकित करता है कि चीन की तिब्बत और शिनजियांग संबंधी नीतियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और मानवाधिकार बहस का विषय बनी हुई हैं।

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