Thwaites Glacier: भारत पर मंडराया बड़ा खतरा, दोगुनी रफ्तार से पिघल रहा है दुनिया का सबसे बड़ा ग्लेशियर, जानें सबकुछ
Thwaites Glacier: दुनिया के सबसे चर्चित ग्लेशियरों में शामिल अंटार्कटिका का थ्वाइट्स ग्लेशियर (Thwaites Glacier) एक बार फिर वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रकाशित एक नए अध्ययन के मुताबिक, इस ग्लेशियर के पिघलने और पीछे हटने की प्रक्रिया से समुद्र का जलस्तर पहले लगाए गए अनुमानों से कहीं ज्यादा बढ़ सकता है। इसका असर भारत समेत दुनिया के तटीय क्षेत्रों पर पड़ने की आशंका है। यह कहना गलत नहीं होगा आने वाले वक्त में भारत जलप्रलय की चपेट में आ सकता है। आईए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
आखिर क्या है थ्वाइट्स ग्लेशियर?
थ्वाइट्स ग्लेशियर पश्चिमी अंटार्कटिका में स्थित है। इसका क्षेत्रफल लगभग 1.92 लाख वर्ग किलोमीटर बताया जाता है, जो इसे दुनिया के सबसे विशाल ग्लेशियरों में शामिल करता है। इसके आकार और तेजी से बदलती स्थिति के कारण वैज्ञानिक लंबे समय से इसकी निगरानी कर रहे हैं।
इसे 'डूम्सडे ग्लेशियर' नाम इसलिए दिया गया है, क्योंकि इसके पीछे हटने से समुद्र का जलस्तर बढ़ने और आसपास की विशाल बर्फ की चादर के अस्थिर होने का खतरा पैदा हो सकता है। यदि पश्चिमी अंटार्कटिका की पूरी बर्फ की चादर लंबे समय में पिघलती है, तो वैश्विक समुद्र का स्तर कई मीटर तक बढ़ सकता है।
भारत के लिए खतरे की घंटी
भारत की लंबी समुद्री तटरेखा है। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और कई अन्य तटीय शहर समुद्र के बढ़ते जलस्तर, तटीय कटाव और बाढ़ जैसे जोखिमों के प्रति संवेदनशील हैं। यदि वैश्विक स्तर पर समुद्र का पानी बढ़ता है, तो तूफान और ऊंची समुद्री लहरों के दौरान तटीय इलाकों में पानी घुसने का खतरा भी बढ़ सकता है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में नेपाल में आए जलप्रय ने हजारों जिंदगियां छीन ली थी। एक्सपर्ट के मुताबिक यह सिर्फ एक ट्रेलर है।
इसके अलावा, समुद्र के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से निचले तटीय क्षेत्रों में खारे पानी के जमीन और भूजल में प्रवेश करने की समस्या गंभीर हो सकती है। इससे खेती, पेयजल और स्थानीय आजीविका प्रभावित होने की आशंका रहती है।