Strait of Hormuz में अमेरिकी सैनिकों की एंट्री से मची खलबली, समुद्र में मचेगा तांडव!
Strait of Hormuz: देश के सबसे चर्चित और मशहूर समुद्र मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सेना की एंट्री ने ईरान में खलबली मचा दी है। दरअसल अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर ने रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य का दौरा किया।
कमांड के अनुसार, इस जलमार्ग से होकर गुजरने वाले मुख्य रास्ते ईरानी समुद्री बारूदी सुरंगों (सी माइन्स) से मुक्त हैं। अब सवाल है। क्या होर्मुज पूरी तरह से अमेरिका के कब्जे में है, या ईरान कोई बड़ा कांड करने जा रहा है। चलिए आपको बताते है कि क्या है पूरी कहानी।
Strait of Hormuz में घातक कमांडो की एंट्री
U.S. Central Command ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा, 25 अक्टूबर को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर ने होर्मुज जलडमरूमध्य का दौरा किया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी सेना ने गर्मियों के बाद से खाड़ी देशों के सहयोगियों को 1.5 बिलियन बैरल से अधिक कच्चे तेल के निर्यात में मदद करने का एक अहम मुकाम हासिल कर लिया है।
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— U.S. Central Command (@CENTCOM) October 25, 2026
एडमिरल ब्रैड कूपर ने इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग के ऊपर अमेरिकी सेना के CH-47 चिनूक हेलीकॉप्टर में उड़ान भरते हुए, वहां के मौजूदा हालात का जायजा लिया।
अमेरिका सेना का होर्मुज पर कब्जा!
अमेरिकी सेना ने लिखा, "हम अपने खाड़ी सहयोगियों और शिपिंग उद्योग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।" "यह दौरा होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से होकर आवाजाही की निरंतर स्वतंत्रता के प्रति हमारी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"
हाल के महीनों में स्थिति में काफी प्रगति हुई है, जब अमेरिकी बलों ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा बिछाई गई समुद्री खदानों को हटाकर, इस जलडमरूमध्य के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों को पूरी तरह साफ कर दिया था।
क्या समुद्र में शुरू होगा तांडव!
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सैनिकों की एंट्री ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान कोई बड़ी कार्रवाई करने वाला है, क्योंकि ईरान लगातार होर्मुज पर अपना दावा करता रहा है। इसके अलावा क्या अमेरिका-ईरान युद्ध देखने को मिल सकता है। ऐसे कई सवाल है जो अब उठना शुरू हो गए है। अगर आने वाले दिनों में टेंशन बढ़ती है तो मिडिल ईस्ट में टेंशन के साथ कई अन्य देशों पर भी संकट मंडरा सकता है।