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407 फीट का महाबली रॉकेट! SpaceX ने लॉन्च किया Starship, पहली बार अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे Starlink V3 सैटेलाइट

Shailesh Yadav · 29 सितम्बर 2026
Elon Musk की SpaceX ने टेक्सास के Starbase से Super Heavy Starship रॉकेट लॉन्च किया। SpaceX के मुताबिक Starlink V3…

नई दिल्ली:  अमेरिकी अंतरिक्ष कंपनी SpaceX ने सोमवार को टेक्सास के Starbase से अपने विशाल Starship रॉकेट को लॉन्च किया। Elon Musk की कंपनी का यह मिशन बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसका लक्ष्य Starship को पहली बार पृथ्वी की कक्षा (Orbit) में पहुंचाना है। इस मिशन के जरिए SpaceX भविष्य में रॉकेट को पूरी तरह और तेजी से दोबारा इस्तेमाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाना चाहती है।

407 फीट ऊंचा है Starship

SpaceX के मुताबिक Starship अब तक बनाया गया सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। इसकी ऊंचाई करीब 407 फीट है। इसमें दो मुख्य हिस्से हैं, नीचे Super Heavy Booster और ऊपर Starship spacecraft। दोनों को दोबारा इस्तेमाल किए जाने के लिए डिजाइन किया गया है। SpaceX का मानना है कि अगर रॉकेट को तेजी से दोबारा इस्तेमाल करने की तकनीक सफल होती है, तो अंतरिक्ष अभियानों की लागत और समय दोनों में बड़ी कमी आ सकती है।

पहली बार 26 Starlink V3 सैटेलाइट होंगे तैनात

इस मिशन की एक और बड़ी खासियत Starlink V3 satellites हैं। Starship से पहली बार 26 Starlink V3 सैटेलाइट तैनात किए जाने की योजना है। Starlink V3 को पिछली पीढ़ी के मुकाबले ज्यादा क्षमता, बेहतर डेटा घनत्व और अधिक पावर जनरेशन के लिए तैयार किया गया है। कंपनी के अनुसार ये सैटेलाइट करीब 1 Tbps डाउनलिंक और 160 Gbps अपलिंक क्षमता को सपोर्ट कर सकते हैं।

करीब 10 घंटे चलेगा मिशन

SpaceX के मुताबिक Starship की शुरुआती ऑर्बिटल उड़ान पृथ्वी से लगभग 275 किलोमीटर की ऊंचाई तक जाने की योजना है। मिशन के दौरान Starship करीब छह बार पृथ्वी की परिक्रमा कर सकता है और पूरी उड़ान लगभग 10 घंटे चलने की उम्मीद है। मिशन के अंत में Starship के प्रशांत महासागर में चिली के पश्चिमी हिस्से के पास स्प्लैशडाउन करने की योजना है।

Booster की लैंडिंग भी होगी अहम

मिशन के दौरान Super Heavy Booster के लिए सफल लॉन्च, स्टेज सेपरेशन, बूस्टबैक बर्न और लैंडिंग बर्न प्रमुख परीक्षण होंगे। इसके बाद इसे Gulf of America में निर्धारित ऑफशोर लैंडिंग क्षेत्र में उतारने की योजना है। पिछली उड़ान में सामने आई समस्याओं को ध्यान में रखते हुए Starship के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में कई बदलाव भी किए गए हैं।

Heatshield की भी होगी जांच

इस मिशन में तीन Starlink V3 सैटेलाइट को विशेष कैमरों से लैस किया गया है। ये कैमरे Starship के हीटशील्ड की तस्वीरें रिकॉर्ड करेंगे और उन्हें जमीन पर मौजूद ऑपरेटरों तक भेजेंगे। इस डेटा से SpaceX को भविष्य की उड़ानों में Starship के दोबारा सुरक्षित तरीके से पृथ्वी पर लौटने की तैयारी और हीटशील्ड की स्थिति का आकलन करने में मदद मिल सकती है।

Moon और Mars तक पहुंचने का सपना

SpaceX Starship को सिर्फ पृथ्वी की कक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहती। कंपनी की दीर्घकालिक योजना इसे चंद्रमा और मंगल जैसे मिशनों के लिए इस्तेमाल करने की है।

अगर Starship को पूरी तरह से दोबारा इस्तेमाल करने की तकनीक सफल होती है, तो यह अंतरिक्ष यात्रा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। इसी बड़े लक्ष्य के साथ SpaceX Starship को उस दिशा में आगे बढ़ा रही है, जहां इंसान पहले कभी नहीं पहुंचा।