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Saharanpur Mosque Demolition: कलेक्ट्रेट में बनी अंग्रेजों के जमाने की मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन, बिजली बिल दिखाकर किया दावा

MADHVI TANWAR · 5 सितम्बर 2026
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद

Saharanpur Mosque Demolition: यूपी के सहारनपुर कलेक्ट्रेट में बनी मस्जिद पर सुबह 5 बुलडोजर से ढहा दिया गया। लेकिन इसके बाद एक नया विवाद शुरु हो गया है क्योंकि कल रात इसे तोड़ने की सूचना फैली थी जिसके बाद DM ने भीड़ को शांत करवाकर लोगों को वापस भेज दिया था। लेकिन जैसे ही अगली सुबह लोग सुबह की नमाज पढ़ने के लिए लौटे तो उन्हें मस्जिद ज़मींदोज़ मिली। ऐसे में अब आशंका जताई जा रही है कि,अब इसे लेकर प्रदेश में नया विवाद जन्म ना ले।

प्रशासन ने बिजली बिल को नकारा

दजरअसल मस्जिद कमेटी ने कोर्ट में 1 जनवरी 1911 का बिजली बिल दिखाकर साबित किया था कि कलक्ट्रेट से पहले ही यहां मस्जिद बनाई गई थी। यह मस्जिद तकरीबन 100 साल पुरानी बताई जा रही है। जिसे अंग्रेजों ने मुस्लिम मजदूरों के लिए बनवाई थी, इसे बनवाने के पीछे की असली वजह यह थी कि, उन्हें नमाज़ पढ़ने के लिए दूर ना जाना पड़े। लेकिन प्रशासन ने मुस्लिम समुदाय द्वारा कोर्ट में दिखाए गए बिजली बिल को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साबित कर दिया कि सहारनपुर में बिजली ही पहली बार साल 1912 में आई थी।

वाद में दोनों पक्षों को सुना

उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत चल रहे वाद में दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने मस्जिद को सरकारी भूमि पर बना अवैध निर्माण मानते हुए बेदखली के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही अवैध अधिभोगियों पर 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने इसे वसूलने का भी आदेश जारी किए।

कैसे सामने आई जिलाधिकारी कार्यालय में छिपी मस्जिद

दरअसल यह मामला बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी द्वारा की शिकायत के बाद सामने आया था। जिसमें कहा गया कि, जिलाधिकारी कार्यालय जैसे संवेदनशील परिसर में बनी मस्जिद का उपयोग केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। इस परिसर में एक डाकघर भी चल रहा है। इसमें मौजूद कई कमरों को भी किराये पर देकर पैसा कमाया जा रहा है।

मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने जारी किया आदेश

कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान नगर मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने आदेश जारी करते हुए कहा कि, कलेक्ट्रेट परिसर स्थित खसरा संख्या-539, जो सरकारी अभिलेखों में कोर्ट/कलेक्ट्रेट के नाम पर दर्ज है। उस सरकारी जमीन पर ही 315 वर्ग मीटर के एक हिस्से में मस्जिद निर्माण हुई। अभी मौजूद सबूतों और अभिलेखों के आधार पर कोर्ट ने इसे अवैध अधिभोग माना है।

30 दिन का समय

कोर्ट ने सभी न्यायिक औपचारिकताएं पूरी करने के साथ-साथ दोनों पक्षों को सुना। साथ ही निर्णय पारित किया गया। इसमें अवैध अधिभोगी अपने दावे को साबित करने में असफल रहे। कोर्ट ने आदेश में अवैध अधिभोगियों को 30 दिन के अंदर स्वयं कब्जा हटाने का समय दिया है। यदि निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं हटाया तो प्रशासन बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई करेगा। निर्धारित जुर्माने की राशि भी नियमानुसार वसूल की जाएगी। ऐसे में अब आदेश के बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटा है। वहीं,इतने पुराने धार्मिक ढांचे पर आए फैसले के बाद मामले पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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