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पंजाब में पराली जलाने के 510 मामले,184 पर लगा जुर्माना! AIR QUALITY को जहरीली होने से कैसे बचाएगी सरकार?

MADHVI TANWAR · 23 अक्टूबर 2026
पंजाब में पराली जलाने के 510 मामले

Punjab News: फसल कटते ही देश के सबसे बड़े अनदाता राज्य यानी पंजाब में अभी धान की 82 प्रतिशत कटाई बाकी है। लेकिन इससे पहले ही पराली जलाने के मामले चिंता का विषय बन चुके हैं। हों भी क्यों न हर साल की पराली का धुआं हवा में जहर घोलने का काम करता है। इस साल पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में अभी तक पराली जलाने की 510 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

दर्ज किए गए मामलों में से 467 मामलों की मौके पर जाकर जांच की गई है। प्रशासन और फ्लाइंग स्क्वाड टीमें लगातार नजर रखे हुए है। आग की घटनाओं पर FIR भी दर्ज की जा रही हैं। अमृतसर, तरनतारन और फिरोजपुर जैसे जिलों में पराली जलाने के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं।

सरकार लगाती है कड़े नियम

सीजन शुरू होता है लेकिन उसके बाद ही पराली जलाने के मामले सरकार के लिए बड़ी समस्या बनकर सामने आते हैं। इस साल पराली जलाने के मामलों ने सरकार और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पहले ही चिंता में डाल दिया है। सरकार द्वारा कड़े नियम और निगरानी भी रखी जा रही है। लेकिन उसके बाद भी लगातार आ रही घटनाएं सरकार की परीक्षा ले रही है।

बात करें सभी जिलों के पराली जलाने के मामलों की तो अमृतसर में 136 मामले सामने आए। जिसमें 127 मामलों की जांच की गई और 51 मामलों में पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया। तरनतारन में 247 घटनाएं में से 229 का निरीक्षण कर 97 मामलों में पर्यावरणीय जुर्माना लगा। हालांकि सभी जिलों की बात करें तो हर जिले का आंकड़ा अलग होगा।

गुरदासपुर में 32, फिरोजपुर में 26, कपूरथला में 18 और फाजिल्का व जालंधर में 9-9 घटनाएं दर्ज होती है। पटियाला में 5 घटनाएं सामने आईं, जिनमें 4 का निरीक्षण किया गया। 3 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया। रिपोर्ट में 227 नोडल और सुपरवाइजरी अधिकारियों को चेतावनी नोटिस जारी करने का उल्लेख है। वहीं, 4 मामलों में FIR दर्ज की है। 166 रेड एंट्री रिकॉर्ड की गई हैं।

अधिकारियों ने विभागीय चार्जशीट या निलंबन के आदेश अभी जारी नहीं किए हैं। प्रशासन की तरफ से पराली जलाने की घटनाओं पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। हालांकि सरकार को चुनौती देते हुए खेतों में पराली जलाने की प्रक्रिया जारी की गई है। दर्ज घटनाओं और पर्यावरणीय मुआवजों के आंकड़े यह संकेत देते हैं, कि निगरानी और कार्रवाई को लगातार प्रभावी बनाए रखने की जरूरत है।

पराली जलाने से होती है यह बीमारी

पराली जलाने (Stubble Burning) से निकलने वाले जहरीले धुएं और बारीक कणों (PM2.5) के कारण सबसे अधिक श्वसन संबंधी (सांस की) बीमारियां होती हैं। धुएं में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसें हमारे फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं। इससे होने वाली मुख्य बीमारियां निम्नलिखित हैं।

अस्थमा (Asthma): हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में भारी दिक्कत होने लगती है और इसके नए मामले भी तेजी से बढ़ते हैं।

सीओपीडी (COPD - क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज): यह फेफड़ों की एक गंभीर बीमारी है, जिससे फेफड़े स्थायी रूप से कमजोर हो जाते हैं और सांस फूलने लगती है।

ब्रोंकाइटिस (Bronchitis): धुएं के कारण सांस की नलियों में सूजन आ जाती है, जिससे लगातार खांसी और कफ की समस्या बनी रहती है।

फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer): लंबे समय तक पराली के जहरीले धुएं और इसमें मौजूद कार्सिनोजेनिक (कैंसरकारी) रसायनों के संपर्क में रहने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

हृदय संबंधी बीमारियां (Heart Diseases)

पराली के धुएं से निकलने वाले बेहद बारीक कण (PM2.5) सांस के जरिए हमारे खून में पहुंच जाते हैं। इससे रक्त वाहिकाओं में सूजन आ सकती है, जिससे दिल का दौरा (Heart Attack) और स्ट्रोक (Stroke) का खतरा काफी बढ़ जाता है।

आंखों और त्वचा की समस्याएं

आंखों में जलन व पानी आना: धुएं के सीधे संपर्क में आने से आंखों में तेज जलन, लालपन और खुजली की समस्या आम हो जाती है।

एलर्जी और त्वचा रोग: इसके कारण गले में संक्रमण, लगातार सूखी खांसी और त्वचा पर रैशेज (खुजली वाले चकत्ते) होने लगते हैं।

विशेष रूप से प्रभावित लोग: पराली के धुएं का सबसे बुरा असर बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से ही दिल या सांस की बीमारी से पीड़ित मरीजों पर पड़ता है।

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