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‘BJP को उसी की भाषा में जवाब दिया’, PM मोदी पर खरगे की टिप्पणी के बचाव में उतरे प्रियांक खरगे

Pradeep Singh · 26 अक्टूबर 2026
प्रियांक खरगे, कांग्रेस नेता

बेंगलुरु: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने अपने पिता का बचाव करते हुए कहा कि पटना में बीजेपी समर्थक की टिप्पणी के जवाब में उन्होंने उसी की भाषा में प्रतिक्रिया दी थी। प्रियांक ने बीजेपी पर गांधी परिवार के खिलाफ पहले की गई टिप्पणियों को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया।

प्रियांक ने कहा कि जब मल्लिकार्जुन खरगे भाषण दे रहे थे, तब एक बीजेपी समर्थक ने प्रधानमंत्री मोदी का जिक्र करते हुए उन्हें चुनौती दी थी। उनके मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष की प्रतिक्रिया इसी टिप्पणी के जवाब में आई।

गांधी परिवार पर टिप्पणियों का उठाया मुद्दा

प्रियांक खरगे ने बीजेपी को उसके पुराने बयानों की याद दिलाते हुए कहा कि पार्टी को विवाद की पूरी पृष्ठभूमि देखनी चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर इंदिरा गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों का भी जिक्र किया।

GST और चुनावी प्रक्रिया पर केंद्र को घेरा

1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की राष्ट्रव्यापी रैली से पहले प्रियांक ने केंद्र की आर्थिक नीतियों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि GST की पिछली व्यवस्था से छोटे व्यापारियों और खुदरा कारोबारियों को नुकसान हुआ। साथ ही, उन्होंने कहा कि राहुल गांधी GST को सरल बनाने की मांग उठाते रहे हैं।

 प्रियांक ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही जरूरी है।

व्यापारियों से प्रदर्शन के समर्थन की अपील

1 नवंबर के प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच प्रियांक ने व्यापारियों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक दिन के विरोध से कारोबार पर बड़े पैमाने पर असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे की मांग भी की।

फॉर्म 6, फॉर्म 7 और CEC की भूमिका पर सवाल

प्रियांक खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से चुनावी प्रक्रिया में किए गए बदलावों पर जवाब मांगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को कथित न्यायिक सुरक्षा दिए जाने, फॉर्म 6 में बदलाव, फॉर्म 7 की बड़े पैमाने पर छपाई और चुनावी सॉफ्टवेयर में बदलाव को लेकर सवाल उठाए।

कांग्रेस नेता के इन आरोपों के बीच 1 नवंबर की प्रस्तावित रैली को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। हालांकि, चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी और सरकारी फैसलों से जुड़े उनके दावे आरोप हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।

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