टीएनपी न्यूज़
होम / राज्य
राज्य

खिदमत को प्राथमिकता दें, युवाओं को आगे बढ़ाएं! मौलाना महमूद मदनी का स्पष्ट संदेश

Geeta Sharma · 15 अक्टूबर 2026
खिदमत को प्राथमिकता दें, युवाओं को आगे बढ़ाएं! मौलाना महमूद मदनी का स्पष्ट संदेश

 

New Delhi: जमीयत उलमा-ए-हिंद का नौवाँ केंद्रीय छमाही मशविरा राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोकरण स्थित दारुल उलूम इस्लामिया में आयोजित किया गया। तीन दिवसीय सम्मेलन में देशभर की प्रांतीय एवं क्षेत्रीय इकाइयों के अध्यक्षों, महासचिवों और नाज़िमों-ए-तंज़ीम ने भाग लिया। बैठक में संगठनात्मक, शैक्षिक और सामाजिक गतिविधियों की समीक्षा करते हुए आगामी छह महीनों के लक्ष्य निर्धारित किए गए।

मिल्लत की सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने अपने संबोधन में कहा कि मुल्क़ और मिल्लत की सेवा संगठन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। मौजूदा परिस्थितियों और मिल्लत की आवश्यकताओं को देखते हुए कार्यकर्ताओं को अधिक मेहनत, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ काम करना होगा। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और पहचान के बजाय सामूहिक उद्देश्यों तथा जनसेवा को महत्व दिया जाना चाहिए। पूर्वजों के बलिदानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं से उनके सेवा-भाव, त्याग और कठिन परिस्थितियों में भी डटे रहने की भावना अपनाने की अपील की।

युवाओं को जिम्मेदारियां सौंपने पर जोर

मौलाना मदनी ने नई नेतृत्व पीढ़ी तैयार करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि युवाओं को काम करने के अवसर दिए जाएँ और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाएं। उन्हें इस तरह प्रशिक्षित किया जाना चाहिए कि वे भविष्य में वर्तमान जिम्मेदारों का प्रभावी विकल्प बन सकें। इससे जमीयत का संदेश और उसकी रचनात्मक गतिविधियां देश के हर गांव और बस्ती तक पहुंचाई जा सकेंगी। जमीयत के उपाध्यक्ष मौलाना मुहम्मद सलमान बिजनौरी ने कहा कि कार्यों का उद्देश्य व्यक्तिगत प्रसिद्धि या स्वार्थ नहीं, बल्कि अल्लाह तआला की प्रसन्नता होना चाहिए।

6 महीने की प्रमुख उपलब्धियां

अप्रैल से अक्टूबर 2026 के दौरान जमीयत की विभिन्न इकाइयों ने दीनी शिक्षा, सामाजिक सुधार, युवा सहभागिता और संगठनात्मक मजबूती के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज कीं। रिपोर्टों के अनुसार, इस अवधि में हजारों नए मक्तब स्थापित किए गए और कुरआन व हदीस की तालीम को नए स्थानों तक पहुंचाया गया। युवाओं को संगठन से जोड़ने, आदर्श मस्जिदों की स्थापना तथा समाज में सद्भावना बढ़ाने के लिए भी व्यापक प्रयास किए गए। इसके अलावा, जन विकास सेवा के तहत गांवों का चयन, प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन और संगठनात्मक बैठकों के माध्यम से जमीयत ने अपनी गतिविधियों का विस्तार किया।

शिक्षा और सामाजिक सुधार की नई योजनाएं

सम्मेलन में दीनी तालीमी बोर्ड, मक्तबों के विस्तार, शिक्षकों के प्रशिक्षण और शैक्षिक गतिविधियों की निगरानी पर चर्चा हुई। आगामी छह महीनों के लिए नए मक्तब स्थापित करने, युवाओं को जोड़ने, सद्भावना कार्यक्रम बढ़ाने और अधिक गाँवों में जन विकास सेवा पहुँचाने के लक्ष्य तय किए गए। बैठक में प्रत्येक इकाई में इस्लाह-ए-मुआशरा समिति गठित करने, आदर्श मस्जिदों के विकास और आदर्श जिलों में फैमिली काउंसलिंग सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव भी स्वीकृत किए गए।

नाज़िम-ए-उमूमी मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी ने पिछली बैठक की कार्यवाही प्रस्तुत की। सम्मेलन की मेज़बानी दारुल उलूम इस्लामिया, पोकरण ने की, जबकि विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने अपनी रिपोर्टें और आगामी कार्ययोजनाएँ पेश कीं।

Reported By: M. Atharuddin Munne Bharti


ये भी पढ़ें: कीर्ति कुल्हारी की प्रोडक्शन डेब्यू फिल्म 'Kinaare' का DIFF में होगा प्रीमियर!