कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का ECI पर निशाना, पूछा- क्या 1960 के नियम को संसद में लाए थे?
पवन खेड़ा की टिप्पणी ऐसे विवाद के बीच आई है जिसमें 1960 के Registration of Electors Rules और Form 6 के साथ अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लेकर सवाल उठे हैं।
ECI का कहना है कि Form 6 में बदलाव नहीं किया गया और अतिरिक्त Annexure D अलग से लागू है।
क्या बोले पवन खेड़ा
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ECI विवाद पर बयान दिया है जिसमें पवन खेड़ा ने समाचार एजेंसी की उस रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु क्या था? किस बिंदु पर 2 चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त से शिकायत थी?
वो ये था कि फॉर्म-6 एक कानूनी फॉर्म है और 1960 के नियमों को बदले बिना उसमें कोई बदलाव नहीं हो सकता था। जिसे बदलने के लिए संसद जाना होगा, लेकिन क्या इसका कोई जिक्र आज की बैठक में किया गया?
मतदान का अधिकार छीन लिया गया
पूरी बहस की बुनियाद यही है लेकिन इसका जिक्र नहीं किया गया। अब उस नियम को बदले बगैर आप फॉर्म-6 लाए,
जिसकी वजह से बिहार और बंगाल में कई लोगों का मतदान का अधिकार छीन लिया गया। यह गैर कानूनी था।
जिन्हें किया नजरअंदाज कौन लेगा उनकी जवाब देही
यदि ये वोट ही गैर कानूनी तरह से छीना गया है तो बिहार और बंगाल में क्या जो चुनाव हुआ वह संवैधानिक है? बहुमत मिला वो संवैधानिक है?
इसका जवाब कोई नहीं देगा। ऐसे कितने और प्रकरण इस देश में हैं जिन्हें नजरअंदाज करा गया। उसकी जवाबदेही कौन लेगा?
क्या आप 1960 के नियम को संसद में लाए?
यह प्रेस वार्ता खोखली है क्योंकि फॉ़र्म-6 में आप परिवर्तन किए बिना 1960 के नियम को परिवर्तित नहीं कर सकते। 1960 का नियम तभी परिवर्तित हो सकता है
जब आप उसे संसद में लाए। क्या आप उसे संसद में लाए? क्या आपने ऐसे परिवर्तन किया?