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Pakistan: भूख से त्रस्त पाकिस्तानी आवाम! विश्व बैंक की रिपोर्ट ने खोल दी शहबाज सरकार की पोल, जानें सबकुछ

Anurag Kumar Tripathi · 29 अक्टूबर 2026
Pakistan

Pakistan: कंगाल पाकिस्तान की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। वहां की आवाम खाने के लिए तरस रही है। आटे की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है, पेट्रोल-डीजल के दाम देख वहां की जनता रो रही है।

इसी बीच विश्व बैंक कि रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। करीब 7 करोड़ की जनता भुखमरी से त्रस्त है। इसके बाद भी शहबाज सरकार के कान पर जूँ तक नहीं ले रही है। खोखले दांवे ने पाकिस्तानी सरकार की पोल खोल दी है।

विश्व बैंक की रिपोर्ट ने खोल दी शहबाज सरकार की पोल

विश्व बैंक का अनुमान है कि 2024-25 में पाकिस्तान में गरीबी का स्तर बढ़कर लगभग 29 प्रतिशत हो गया है, जिससे करीब 7 करोड़ (70 मिलियन) लोग राष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे आ गए हैं। 2018-19 और 2024-25 के बीच वास्तविक वेतन में सालाना औसतन 3.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह पाकिस्तानी अधिकारियों के उन दावों के विपरीत है, जिनमें कहा गया है कि देश में गरीबी कम हो रही है। परिवारों के लिए, आर्थिक सुधार का मतलब - 

कर्ज में डूबे बिना भोजन खरीदना, किराया चुकाना, बच्चों को पढ़ाना और अचानक आने वाले खर्चों को पूरा करना। जो परिवार गरीबी रेखा से ठीक ऊपर हैं, वे बीमारी, नौकरी छूटने, किराया बढ़ने या अन्य जरूरी खर्चों में बढ़ोतरी के कारण गरीबी रेखा के नीचे जा सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनौती एक ऐसी अर्थव्यवस्था बनाने की है, जिसमें परिवार आर्थिक झटकों के बावजूद अपनी आजीविका बनाए रख सकें।

महंगाई में जबरदस्त बढ़ोतरी से मचा बवाल

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति महंगाई दर सालाना आधार पर 10.26 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। जबकि IMF के अक्टूबर के अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए औसत महंगाई दर 9.9 प्रतिशत रहने की संभावना है। यह दबाव विशेष रूप से परिवारों के भोजन बजट पर साफ दिखाई देता है। गेहूं, आटा, सब्जियां और मांस जैसी जरूरी खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतें परिवारों को मुश्किल फैसले लेने पर मजबूर कर सकती हैं।

जब मांस खरीदना मुश्किल हो जाता है, तो परिवार इसे कम बार खरीद सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भोजन की बढ़ती लागत के कारण परिवारों को खाने की मात्रा कम करनी पड़ सकती है, आहार की विविधता से समझौता करना पड़ सकता है, या अन्य खर्चों को टालना पड़ सकता है।

यह कहना गलत नहीं है कि पाकिस्तानी आवाम ने शहबाज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। लगातार गरीबी बढ़ रही है।

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