Pakistan में हिंदुओं की दर्दनाक हकीकत! 14 प्रतिशत से घटकर मात्र 1.5 प्रतिशत बची आबादी, वजह जान दहल उठेगा कलेजा
Pakistan: पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। 1947 में भारत से अलग होने के बाद लगातार हिंदुओं पर जुल्म किया गया, धर्म परिवर्तन कराया गया। स्थिति यह है हिंदुओं की आबादी करीब 15 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत की आसपास रह गई है। यह स्थिति पाकिस्तान और उसकी सरकार के शर्मनाक चेहरे को दिखाता हैं।
इसी बीच ब्रिटिश हिंदू संगठन इनसाइट यूके की एक रिपोर्ट ने ऐसा खुलासा किया है, जिसे पढ़ आपका खून खौल जाएगा। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
Pakistan में हिंदुओं की दर्दनाक हकीकत
रिपोर्ट में हिंदुओं की आबादी घटने की वजह हिंसा और धर्म परिवर्तन बताया गया। 1947 से लेकर अभी तक के पूरे घटनाक्रम को देखा जाए तो इस दौरान हिंदुओं की आबादी घटने की वजह हिंसा और धर्म परिवर्तन बताया गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि बंटवारे के समय और उसके बाद हजारों हिंदू परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा। कई परिवारों की पुश्तैनी जमीन और खेत भी छिन लिए गए। आए दिन पाकिस्तान से ऐसी खबरें आती रहती है। रिपोर्ट में धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले भी उठाए गए हैं।
पाकिस्तान में नहीं बन सकते राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 41 और 91 का जिक्र किया गया है। इनके तहत राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का पद केवल मुस्लिम नागरिकों के लिए है। यानि पाकिस्तान में हिंदू ना तो राष्ट्रपति बन सकते है और ना ही प्रधानमंत्री बन सकते।
संगठन ने यह भी कहा कि पाकिस्तान में पासपोर्ट बनवाते समय नागरिकों को अपना धर्म बताना पड़ता है। इस्लामाबाद में हिंदू मंदिर बनाने की योजना भी अब तक पूरी नहीं हुई हैं।
महिलाओं पर जुर्म की सारी हदें पार
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान में हर साल करीब 1000 या इससे ज्यादा हिंदू और ईसाई महिलाओं व लड़कियों का अपहरण होता है। आरोप है कि बाद में उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराकर अपहरण करने वालों से शादी करा दी जाती है। इनमे कई नाबालिग तो गरीब परिवारों से होती है। जिसकी वजह से उनके माता पिता आगे की कानूनी कार्रवाई नहीं लड़ पाते है।
यह भी पढ़े - America-Bangladesh Ties: बंगाल की खाड़ी में अमेरिका की एंट्री से हड़कंप! भारत के लिए क्यों बना सिरदर्द