Pakistan में आपातकाल या तख्तापलट? खैबर पख्तूनख्वा में सेना की एंट्री से शहबाज सरकार में हड़कंप!
Pakistan: पाक एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा संकट को लेकर चर्चा में है। खैबर पख्तूनख्वा में सेना की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों ने शहबाज शरीफ सरकार की चुनौतियों को बढ़ा दिया है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या पाकिस्तान में हालात सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित हैं या देश किसी बड़े राजनीतिक संकट की ओर बढ़ रहा है? हाल ही में पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने खैबर पख्तूनख्वा आपातकाल की घोषणा कर दी थी।
Khyber Pakhtunkhwa में आपातकाल या तख्तापलट?
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने सुरक्षा हालात बिगड़ने का हवाला देते हुए खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लगाने का फैसला किया है। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या पाकिस्तान में एक और सैन्य तख्तापलट हो रहा है। भले ही संसद के पास टैंक न आए हों और न ही जनरल टीवी पर आकर लोकतंत्र को निलंबित करने की घोषणा कर रहे हों। इसका जवाब काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि कोई 'तख्तापलट' को कैसे परिभाषित करता है।
क्या शहबाज शरीफ सरकार पर बढ़ रहा है दबाव?
पाकिस्तान में केंद्र और प्रांतों के बीच अधिकारों, सुरक्षा नीति और प्रशासनिक फैसलों को लेकर मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं। खैबर पख्तूनख्वा में किसी बड़े सुरक्षा अभियान या सेना की भूमिका को लेकर विवाद की स्थिति बनती है, तो उसका असर संघीय सरकार की राजनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है।
शहबाज शरीफ सरकार के सामने आर्थिक चुनौतियों, राजनीतिक विरोध और सुरक्षा संबंधी चिंताओं जैसे कई मुद्दे हैं। ऐसे माहौल में सेना से जुड़ा कोई भी बड़ा घटनाक्रम सरकार के लिए अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकता है।
भुखमरी के रास्ते पर पहुंचा पड़ोसी मुल्क
Pakistan में केंद्र और प्रांतों के बीच अधिकारों, सुरक्षा नीति और प्रशासनिक फैसलों को लेकर मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं। खैबर पख्तूनख्वा में किसी बड़े सुरक्षा अभियान या सेना की भूमिका को लेकर विवाद की स्थिति बनती है, तो उसका असर संघीय सरकार की राजनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है।
भुखमरी के रास्ते पर पहुंचा पड़ोसी मुल्क
पाकिस्तान की आवाम शहबाज सरकार के खिलाफ हो गई है। देश में महंगाई सातवें आसमान पर है। आटा, चावल खरीदना मुश्किल हो गया है। वहीं एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भुखमरी के मामले में पाकिस्तान पूरे एशिया में दूसरे नंबर पर है। यह कहना गलत नहीं होगा कि शहबाज सरकार पर हर तरफ से दवाब बढ़ रहा है।