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टुकड़ों में बंट जाएगा Pakistan! आसिम मुनीर के नए प्लान से पड़ोसी मुल्क में हलचल तेज, पढ़े पूरी रिपोर्ट

Anurag Kumar Tripathi · 9 अक्टूबर 2026
Pakistan

Pakistan: पड़ोसी मुल्क में स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की संभावना हैं। 'द इकोनॉमिस्ट' के मुताबिक, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान को छोटे प्रांतों में बांटना चाहते हैं। इससे इनकी संख्या बढ़कर 12-15 हो सकती है या फिर 160 तक छोटे इलाके बनाए जा सकते हैं।

दरअसल खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान समेत कई जगहों पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन उग्र होता जा रहा है और स्थिति नियंत्रण करना मुश्किल हो गई है। यही कारण है कि मुल्ला मुनीर और पाकिस्तान सरकार बड़ा फैसले ले सकते है। आईए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।

क्या टुकड़ों में बंट जाएगा पाकिस्तान?

दरअसल पंजाब की बात करें तो आबादी के लिहाज से पंजाब सबसे बड़ा प्रांत है, जिसकी आबाद 12 करोड़ से अधिक है। वहीं क्षेत्रफल के हिसाब से बलूचिस्तान सबसे बड़ा प्रांत है। चूंकि पिछले कई महीनों से बलूचिस्तान की आवाम आसिम मुनीर और शहबाज सरकार के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है।

वहीं बलूच लगातार पाकिस्तान के सैनिकों को शिकार बना रहे है, यहीं कारण है कि अब सवाल शुरू हो गया है कि अब पाकिस्तान टुकड़ों में बंटने वाला है?

पड़ोसी मुल्क में गहराया आर्थिक और राजनीतिक संकट

पाकिस्तान में आर्थिक और राजनीतिक संकट गहराया हुआ है। एक तरफ देशभर में आर्थिक संकट के कारण आम लोगों को रोटी तक खाना मुश्किल हो गया है। 20 किलोमीटर आटे की कीमत 3 हजार रूपये के पार पहुंच चुकी है। इसके अलावा पड़ोसी मुल्क में राजनीतिक संकट भी गहराने लगा है। पूर्व पीएम इमरान खान के समर्थन में लाखों लोग सड़कों पर है और शहबाज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

पंजाब-सिंध अलग होने से क्या होगा असर?

पाकिस्तान के प्रांत सिर्फ़ प्रशासनिक इकाइयाँ नहीं हैं। वे राजनीतिक प्रभाव के अहम केंद्र भी हैं। पंजाब पर पारंपरिक रूप से 'पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़' का दबदबा रहा है, जबकि सिंध 'पाकिस्तान पीपल्स पार्टी' का गढ़ रहा है। सैन्य शासन के दौर में भी इन दोनों प्रांतों का राजनीतिक प्रभाव काफ़ी बना रहा है। अपने आकार और चुनावी ताकत की वजह से ये प्रांत केंद्र सरकार के सामने एक मज़बूत संतुलन बनाए रखने में सक्षम रहे हैं।

इन प्रांतों को छोटी इकाइयों में बाँटने से उनका राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है और केंद्र को चुनौती देने की उनकी क्षमता भी कमज़ोर पड़ सकती है। इसलिए, यह प्रस्ताव न सिर्फ़ प्रशासनिक नज़रिए से, बल्कि पाकिस्तान के व्यापक सत्ता-ढाँचे के लिहाज़ से भी काफ़ी अहम है।

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