Pakistan: अपने ही जाल में फंस गया आसिम मुनीर! खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी का अमेरिकी कनेक्शन, भारत की नई चाल!
Pakistan: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की हालत लगातार पतली होती जा रही है। कंगाल मुल्क चारों तरफ से घिरता हुआ नजर आ रहा है। पाकिस्तान की कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल (JUI-F) के चीफ मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व और केंद्र की शहबाज शरीफ सरकार पर हमला बोला है।
साथ ही खैबर पख्तूनख्वा में लगी इमरजेंसी पर चीफ ने अमेरिकी कनेक्शन आ आरोप लगाया है। बीते कई दिनों से ऐसी खबरें तेजी से फैल रही है।
अपने ही जाल में फंस गया आसिम मुनीर
आर्थिक से लेकर राजनीतिक संकट तक, पाकिस्तान की आवाम इस वक्त गहरे संकट से जूझ रही है। एक तरफ लोग दाने-दाने के लिए तरस रहे है तो दूसरी तरफ खैबर पख्तूनख्वा में लगी इमरजेंसी ने हालात और खराब दी है।
अब इसे लेकर एक अन्य तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई है। दरअसल केपीके इमरजेंसी में अब अमेरिकी कनेक्शन की बात कही जा रही है। मालूम हो कि इस प्रांत में कच्चे तेल और अन्य खनिजों का भंडार है।
असीम मुनीर की भूमिका पर क्यों उठ रहे सवाल?
पाकिस्तान में सेना का राजनीतिक और विदेश नीति से जुड़ा प्रभाव लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। मौजूदा संकट के दौरान भी सेना प्रमुख असीम मुनीर की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि खैबर पख्तूनख्वा में संघीय नियंत्रण बढ़ने से वहां के खनिज संसाधनों से जुड़े फैसलों पर सेना और केंद्र सरकार का प्रभाव बढ़ सकता है।
वहीं अब केपीके के एंट्री ने कई तरह की चर्चाओं के जन्म दे दिया है। दरअसल 1 अक्टूबर 2026 को पाकिस्तान में अमेरिकी चार्ज डी'अफेयर्स नताली ए बेकर ने देश के खनन क्षेत्र को विकसित करने में अमेरिकी सहयोग का उल्लेख किया था।
इसके बाद खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू होने और विदेशी निवेश को आमंत्रित करने की खबरों ने संसाधनों के नियंत्रण को लेकर बहस तेज कर दी। इन बयानों के बाद शक और गहरा दिया है।