चुनाव आयोग के जवाब पर दीपांकर भट्टाचार्य, बोले- ‘यह अपराध की स्वीकारोक्ति’
पटना: चुनावी वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच CPI(ML) Liberation के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने रविवार को चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण पर असंतोष जताया। उन्होंने आयोग के जवाब को ‘अपराध की स्वीकारोक्ति’ बताया।
यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें दावा किया गया था कि SIR प्रक्रिया से जुड़े कुछ फैसलों को तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने लेकर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर सवाल उठाए थे।
‘हम बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं’
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि वह चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने आयोग के जवाब को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह उनके अनुसार ‘स्वीकारोक्ति’ है और ऐसी स्थिति में संबंधित पदों पर बने रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
हालांकि, चुनाव आयोग ने अपने हालिया स्पष्टीकरण में कहा है कि 24 जून 2025 को जारी देशव्यापी SIR आदेश को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी प्राप्त थी। आयोग ने यह भी कहा कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 27 अक्टूबर 2025 तथा 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 को जारी कार्यक्रम भी सर्वसम्मति से मंजूर किए गए थे।
30 सितंबर को INDIA ब्लॉक की बैठक
भट्टाचार्य ने बताया कि इस मुद्दे पर 30 सितंबर को INDIA ब्लॉक की बैठक प्रस्तावित है। उनके अनुसार, बैठक में इस मामले पर चर्चा की जाएगी और विपक्षी दलों के साथ-साथ अन्य राजनीतिक दलों तथा नागरिक समाज के साथ आंदोलन की दिशा पर विचार किया जाएगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब SIR और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी जारी है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीतिगत नीति या IT डिवीजन से संबंधित नहीं था, बल्कि ECI में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था। आयोग के अनुसार, संबंधित अधिकारी द्वारा जारी किए गए कार्य-वितरण आदेशों को दो चुनाव आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किया गया और IT डिवीजन की निगरानी भी वापस नहीं ली गई थी।
ECI ने यह भी कहा कि SIR के दौरान जिन मतदाताओं को ‘unmapped’ या तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस मिले हैं, उनके दस्तावेज लेने के लिए Booth Level Officers (BLOs) उनके घर जाएंगे। विशेष परिस्थितियों में, Electoral Registration Officer (ERO) के निर्णय के अनुसार सुनवाई ऑनलाइन भी हो सकती है।
आयोग ने यह भी दोहराया कि SIR से जुड़े कुछ प्रमुख आदेशों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरकरार रखा गया है।
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