BJP के संस्थापक सदस्य RK सिन्हा का निधन, नोएडा स्थित आवास पर ली अंतिम सांस
Noida News: भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद और सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) ग्रुप के संस्थापक आरके सिन्हा का 30 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। उन्होंने नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से राजनीतिक और कारोबारी जगत में शोक की लहर है। भाजपा के लिए भी इसे एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।
आरके सिन्हा राजनीति के साथ-साथ कारोबार की दुनिया में भी एक प्रतिष्ठित पहचान रखते थे। उन्होंने वर्ष 1974 में बिहार की राजधानी पटना से SIS ग्रुप की शुरुआत की थी। अपनी दूरदर्शिता और नेतृत्व के दम पर उन्होंने इस कंपनी को सुरक्षा एवं मानव संसाधन सेवाओं के क्षेत्र में देश-विदेश तक पहुंचाया।
आज SIS ग्रुप भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में अपनी सेवाएं दे रहा है। कंपनी को एशिया-प्रशांत क्षेत्र की प्रमुख मैनपावर और सिक्योरिटी सेवा कंपनियों में शामिल किया जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कंपनी में 36 हजार से अधिक स्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि इसके 3 हजार से ज्यादा कॉर्पोरेट ग्राहक हैं।
भाजपा के संस्थापक सदस्यों में थी गिनती
आरके सिन्हा भाजपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। उन्होंने लंबे समय तक पार्टी के साथ जुड़कर काम किया और राज्यसभा सांसद के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। राजनीतिक जीवन के अलावा उन्होंने उद्यमिता के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय पहचान बनाई। पटना से शुरू किया गया उनका सुरक्षा सेवा का कारोबार धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया। उनके निधन पर भाजपा नेताओं और अन्य लोगों ने दुख जताया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व सांसद और SIS के संस्थापक के रूप में उनके योगदान को याद किया जा रहा है। उनके निधन को राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है।
जनवरी 2025 में आया था ब्रेन स्ट्रोक
आरके सिन्हा को जनवरी 2025 में भी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा था। एक बैठक के बाद घर लौटते समय उन्हें अचानक ब्रेन स्ट्रोक आया था। इसके बाद उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया और लंबे समय तक उनका इलाज चला था। कारोबार के क्षेत्र में उनकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2025 में फोर्ब्स के हवाले से उनकी संपत्ति करीब 1 अरब डॉलर बताई गई थी। उनके निधन से राजनीतिक और कारोबारी जगत ने एक ऐसी शख्सियत खो दी है, जिसने राजनीति के साथ-साथ उद्यमिता के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई थी।
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