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मैथ्स के डर ने बनाया जीनियस! 8 साल की उम्र में बना दुनिया का सबसे कम उम्र का Programmer

Geeta Sharma · 16 सितम्बर 2026
नोआ विलियम्स बने सबसे कम उम्र के कंप्यूटर प्रोग्रामर

World's Youngest Programmer: जिस उम्र में बच्चे कार्टून देखने और वीडियो गेम खेलने में लगे होते है, उस उम्र में 8 साल बच्चे ने प्रोग्रामिंग की दुनिया में
ऐसा मुकाम हासिल किया की उसका नाम Guinness World Records में दर्ज कर लिया गया है। बता दें, ये कहना है ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में रहने वाले नोआ विलियम्स की।

6 साल की उम्र में शुरू हुआ कोडिंग का सफर

बताया जा रहा है कि नोआ ने महज 6 साल की उम्र में कोडिंग सीखना शुरू किया। बताया जाता है कि उन्हें मैथ्स के पैटर्न और लंबे कैलकुलेशन वाले होमवर्क में परेशानी होती थी। इसी समस्या का समाधान खोजते हुए उन्होंने एक ऐसा प्रोग्राम बनाने के बारे में सोचा, जो गणित के सवालों को हल करने में उनकी मदद कर सके।

यहीं से उनकी प्रोग्रामिंग में दिलचस्पी बढ़ती चली गई। उन्होंने C++ जैसी लोकप्रिय और जटिल प्रोग्रामिंग भाषा सीखनी शुरू की। कम उम्र में प्रोग्रामिंग सीखने की उनकी क्षमता ने परिवार और आसपास के लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

Mensa टेस्ट में 99.9 पर्सेंटाइल

नोआ की प्रतिभा का एक और उदाहरण तब सामने आया, जब उन्होंने 7 साल की उम्र में Mensa का IQ टेस्ट दिया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने इसमें 99.9वें पर्सेंटाइल का स्कोर हासिल किया।

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यह प्रदर्शन उनकी असाधारण तार्किक और विश्लेषणात्मक क्षमताओं की ओर इशारा करता है। हालांकि IQ स्कोर किसी व्यक्ति की पूरी क्षमता को परिभाषित नहीं करता, लेकिन नोआ के मामले में यह उनकी कम उम्र में विकसित हुई सीखने की क्षमता की एक झलक जरूर देता है।

Guinness World Records में दर्ज हुआ नाम

नोआ की उपलब्धि को उस समय एक बड़ा मुकाम मिला, जब Guinness World Records ने उन्हें दुनिया का सबसे कम उम्र का प्रोफेशनल कंप्यूटर प्रोग्रामर मान्यता दी। रिकॉर्ड के मुताबिक, 8 अगस्त 2025 को यह उपलब्धि दर्ज की गई थी और उस समय नोआ की उम्र 8 साल और 307 दिन थी। उनका खुद का कंप्यूटर प्रोग्राम एक स्वतंत्र फर्म द्वारा प्रकाशित किए जाने के बाद यह उपलब्धि हासिल हुई।

अब रोबोटिक्स और ड्रोन पर फोकस

नोआ की रुचि केवल कंप्यूटर प्रोग्रामिंग तक सीमित नहीं है। Guinness World Records की जानकारी के अनुसार, वे अब रोबोटिक्स और ड्रोन जैसी तकनीकों में भी दिलचस्पी ले रहे हैं।

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बच्चों की जिज्ञासा कल्पना कभी-कभी से परे होता है

एक छोटे बच्चे का गणित के होमवर्क की समस्या से प्रेरित होकर कोडिंग की ओर बढ़ना और फिर पेशेवर प्रोग्रामिंग के रिकॉर्ड तक पहुंचना निश्चित रूप से एक दिलचस्प सफर है। नोआ की कहानी यह भी दिखाती है कि बच्चों की जिज्ञासा और किसी समस्या को अपने तरीके से हल करने की कोशिश कभी-कभी उन्हें ऐसी दिशा में ले जा सकती है, जिसकी शुरुआत में कल्पना भी नहीं की गई थी।