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वाराणसी से कोलकाता का सफर अब सिर्फ 6 घंटे में! 672 KM का एक्सप्रेसवे बदलेगा यूपी-बिहार-झारखंड की तस्वीर

Shailesh Yadav · 18 अक्टूबर 2026
Varanasi Ranchi Kolkata Expressway (AI PHOTO)

Varanasi Ranchi Kolkata Expressway: वाराणसी से रांची होते हुए कोलकाता जाने वालों के लिए बड़ी राहत की उम्मीद है। अभी जिस सफर को पूरा करने में 10 से 12 घंटे तक लग जाते हैं, वह वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे बनने के बाद करीब 6 घंटे में पूरा हो सकेगा। लगभग 672 किलोमीटर लंबा यह छह लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे चार राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। इससे न केवल यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि व्यापार, माल ढुलाई, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।

672 किलोमीटर का एक्सप्रेसवे, चार राज्यों को मिलेगी रफ्तार
भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे इस एक्सप्रेसवे की प्रगति और तकनीकी विशेषताओं की जानकारी शुक्रवार को एनएचएआई के औरंगाबाद परियोजना निदेशक देवेंद्र कुमार बंसल ने दी। गया जिले के इमामगंज क्षेत्र के बतेसा स्थित परियोजना कैंप में आयोजित मीडिया टूर के दौरान उन्होंने बताया कि एक्सप्रेसवे का लगभग 161 किलोमीटर हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा।

इस सड़क के तैयार होने के बाद वाराणसी से कोलकाता तक आवागमन पहले की तुलना में तेज और सुविधाजनक होने की उम्मीद है। खासकर व्यापारिक वाहनों को इसका लाभ मिलेगा, जिससे माल की आवाजाही में लगने वाला समय कम हो सकता है।

गया में 1,248 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा निर्माण
परियोजना निदेशक के मुताबिक, गया जिले में एक्सप्रेसवे के 33.5 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण 1,248.37 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। यहां निर्माण कार्य का लगभग 35 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इस हिस्से का निर्माण जीआर इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड कर रही है और इसे दिसंबर 2027 के अंत तक पूरा किए जाने की संभावना जताई गई है।

निर्माण कार्यों का जायजा लेने पहुंचे मीडिया प्रतिनिधियों को चपड़ी गांव के पास परियोजना स्थल का भ्रमण भी कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि सड़क की ढलाई तीन परतों में की जा रही है, ताकि सड़क की मजबूती और टिकाऊपन बेहतर रहे।

12 पुल, 8 फ्लाईओवर और 19 अंडरपास से आसान होगा सफर
एक्सप्रेसवे पर केवल तेज रफ्तार से यात्रा की सुविधा ही नहीं होगी, बल्कि यातायात को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए कई आधुनिक संरचनाएं भी बनाई जाएंगी। गया जिले के हिस्से में प्रस्तावित निर्माण की प्रमुख विशेषताएं हैं।
12 पुल: तीन बड़े और नौ छोटे पुल
8 फ्लाईओवर: यातायात को सुचारु बनाने के लिए
19 वाहन अंडरपास: स्थानीय आवाजाही की सुविधा के लिए
1 इंटरचेंज और 1 टोल प्लाजा
2 रेस्ट एरिया: यात्रियों के ठहरने और आराम के लिए
2 हाथी अंडरपास और 2 एनिमल ओवरपास: वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए

इन सुविधाओं का उद्देश्य एक्सप्रेसवे पर यात्रा को तेज बनाने के साथ सड़क सुरक्षा और स्थानीय संपर्क को भी बेहतर करना है।

सड़क किनारे लगेंगे 50 हजार पौधे, वन्यजीवों का भी रखा जाएगा ध्यान
परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को भी शामिल किया गया है। गया जिले में एक्सप्रेसवे के किनारे लगभग 50 हजार पौधे लगाने का प्रस्ताव है। इसके लिए वन विभाग और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के सहयोग से योजना तैयार की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्य के लिए एनएचएआई ने वन विभाग को लगभग 50 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। वन्यजीवों की आवाजाही के लिए हाथी अंडरपास और एनिमल ओवरपास का प्रावधान भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कब तक बनकर तैयार हो जाएगा?
NHAI वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे का काम दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। पूरा होने से चार राज्यों के बीच सड़क संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है। कम यात्रा समय से पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो सकती है और कारोबारियों को माल ढुलाई में सुविधा मिल सकती है। निर्माण के दौरान भी रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। हालांकि, वाराणसी से कोलकाता तक करीब छह घंटे में पहुंचने का अनुमान एक्सप्रेसवे के तैयार होने और यात्रा की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल गया जिले में निर्माण कार्य जारी है और परियोजना की अगली प्रगति पर सभी की नजर रहेगी।  

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